188 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
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संगठन से ही राजनीतिक ताकत प्राप्त होगी
21 जुलाई, 1950 के दिन भारत के कानून मंत्री डॉ. बाबासाहेब अम्बेडकर मनमाड़ के रास्ते औरंगाबाद में स्पेशल सेलून से दोपहर डेढ़ बजे पहुंचे। रोटेगाव-लासूर में अनगिनत लोगों ने आदर और भक्तिभाव के साथ डॉ. बाबासाहेब का स्वागत किया। स्टेशन पर पुलिस ने उन्हें सलामी ( Guard of Honour) दी।
जनसमुदाय का अभिवादन
शनिवार 22 जुलाई, 1950 के दिन डॉ. बाबासाहेब अम्बेडकर रु. 2001 की सहयोग राशि प्रदान के कार्यक्रम में उपस्थित रहेंगे यह खबर बिजली की गति से पूरे शहर में फैली। शहर के और बाहर के भी हजारों पुरुष और महिलाएं दस बजे से ही सभास्थान में आने लगे। बाबासाहेब के दर्शन होंगे, बाबासाहेब का भाषण भी सुनने को मिलेगा इस
खयाल में खोई कई महिलाओं को अपने बच्चों तक की सुध नहीं रही। साढे पांच बजे बाबासाहेब की मोटर आई तब अनगिनत महिलाओं ने दूर से ही भक्तिभाव से बाबासाहेब को नमन किया। उन पर फूलों की वर्षा की। इस अवसर पर अनुशासन बनाए रखने के लिए चालीसगांव के मुनाजी लळिंगकर और हं. शु. निकम ने औरंगाबाद के कार्यकर्ताओं का सहयोग किया।
श्री कन्नडकर मोरे का निवेदन
अखिल हैदराबाद स्टेट शेड्यूल्ड कास्टस् फेडरेशन, औरंगाबाद की ओर से श्री बी. एस. मोरे कन्नडकर ने शुरुआती औपचारिक भाषण दिया। संक्षेप में स्टेट में दलितों की स्थिति के बारे में जानकारी दी। कहा दलित जनता में आजादी, प्रेम और स्वाभिमान का भाव निर्माण कर दलितों-अस्पृश्यों में स्वाभिमान की भावना को निर्माण करने का श्रेय पूरी तरह से डॉ. बाबासाहेब अम्बेडकर को ही जाता है। किसान, मजदूर और अस्पृश्यों का उद्धार डॉ. बाबासाहेब के अलावा किसी और से होने वाला नहीं है बात का पता सबको हो चला है ऐसा भी उन्होंने कहा। आखिर में 2001 रुपयों की थैली डॉ. बाबासाहेब अम्बेडकर को सादर अर्पण की गई। बाद में डॉ. बाबासाहेब अम्बेडकर तालियों की गड़गड़ाहट के बीच बोलने के लिए उठकर खड़े हुए। कहा-
जनताः 5 अगस्त, 1950