272 21-7-1950 संगठन से ही राजनीतिक ताकत प्राप्त होगी - औरंगाबाद - Page 208

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मेरे मित्रों, बहनों और भाईयों

सब लोगों ने मिलकर जो थैली अर्पण की है उसके लिए मैं आपको धन्यवाद देता हूं। थैली अर्पण करने की कोई वजह नहीं थी। किसी प्रलोभन के कारण मैंने कभी सेवा नहीं की। आप सबकी थोड़ी-बहुत सेवा करना मेरा नैतिक कर्तव्य है। थैलियों के जरिए मुझे जो थोड़ा-बहुत पैसा मिला उसे मैंने अपने आप पर खर्च नहीं किया। गांधी को कुछ करोड़ रुपयों की थैलियां दी गईं। तिलक को नौ लाख रुपयों की थैलियां दी गईं। हमारी बात उनकी तरह बिल्कुल नहीं है।

मेरी ओर से आपकी निस्वार्थ भाव से सेवा होनी चाहिए बस यही मेरी महत्वाकांक्षा है। अपने भाषण में मेरे मित्र आयु. बी. एस. मोरे ने जो बातें बताईं वह रोंगटे खड़े कर देने वाली हैं। पहले की स्थितियां और अब की स्थितियों में जमीन-आसमान का फर्क है। दौलताबाद का किला देखने आया था तब मेरे मित्र पानी पीने के लिए हौज पर गए और पानी पीने लगे। तब 15-20 साल के एक मुसलमान लड़के ने हम पर गालियों की बौछार की। उसी दौर में, लोगों ने जब देखा कि हम औरंगाबाद आए हैं तब उन्होंने भजन गाकर रतजगा किया। तब आप सोचते कि अन्याय सहते रहना ही हमारा भाग्य है। स्वागताध्यक्ष के शुरुआती वक्तव्य से ऐसा ही लगता है कि अभी भी निजामशाही की छाया बाकी बची है। आगामी राजनीति में आपको कुछ बड़ी सहभागिता मिलने वाली है। स्टेट में अब आपकी जनसंख्या 25 प्रतिशत है। राजकाज में अब हम भी शरीक होंगे। पुराना जमाना अब बीत गया। आने वाला समय उज्जवल है। आप लोगों को राजनीतिक ताकत मिलने वाली है। संगठन को यह ताकत मिलेगी। आपको अधिक नेता नहीं चाहिए। जो नेता हैं उनकी बात मानिए।

पानी अगर मैदान में गिरता है तो फैल जाता है। गड्डों में गिरता है तो वहां वह इकठ्ठा होगा। उसी प्रकार आप लोगों को एकजुट होकर शेड्यूल्ड कास्टस् फेडरेशन के झंडे तले इकठ्ठा होना। आपको भी इंसान होने का हक है। अगर कोई उन्हें छीनता है तो उस सरकार के खिलाफ न्याय की गुहार लगाने के लिए राष्ट्र का सुप्रीम कोर्ट है, वहां आप जा सकते हैं। इसलिए डरना नहीं और एक रहो संगठित होकर लड़ो। आज मैं बस यही आप लोगों से कहना चाहता हूं।

रु. 2001 की सहयोग राशि की थैली डॉ. बाबासाहेब ने आयु. सुब्बय्या सोहन को अगले चुनाव में खर्च करने के लिए दी और जयघोष के साथ सभा समाप्त हुई।