196 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
जिनके पास फुर्सत है वे यहां आएं और पहले जानें कि बौद्ध धर्म क्या है। उसके बाद अगर ठीक लगे तो ही बौद्ध धर्म का स्वीकार करें। भानुमति का कुनबा बनाकर नहीं चलेगा। बौद्ध धर्म स्वीकारते हैं तो केवल उसी का पालन करें, बाकी सब छोड़ दें।
इस समय धर्म में शिथिलता आई है। मैं कहता हूं कि धर्म की सबको आवश्यकता है। मेरे मतानुसार एक बात पक्की है। धर्म के बगैर समाज जिंदा नहीं रह सकता। समाज को धर्म चाहिए और वह धर्म केवल बौद्ध धर्म ही होना चाहिए। दुनिया के उद्धार के लिए आवश्यक समता, प्रेम, बंधुभाव आदि सब बातें बौद्ध धर्म में ही हैं। पिछले 20 सालों से मैंने धर्मों का अध्ययन किया है और लगभग हर धर्म के बारे में अध्ययन किया है। सभी धर्मों का गहन चिंतन-मनन करने के बाद मुझे लगता है कि दुनिया को केवल बौद्ध धर्म को ही अपनाना चाहिए।
सोचिए। किसी समय यह देश सुसंस्कृत था ऐसा कहा जाता है। तो फिर उस देश में 5 करोड़ अस्पृश्य कैसे पैदा हुए? करीब 5-7 करोड़ लोगों के लिए उपजीविका कमाने के लिए चोरी-चकारी करनी पड़े यह कैसे हुआ? अस्पृश्यता अपनाने वाला कोई धर्म दुनिया में नहीं है। तत्कालीन और वर्तमान के नेताओं ने उसे समाप्त करने की कोशिश क्यों नहीं कीं? चोरी-चकारी कर जीने वाली जाति जिसमें पैदा होती है उस संस्कृति को सुसंस्कृति कहा भी जा सकता है क्या? ऐसी जनजातियों को सुधारने की लोगों ने कोशिश ही नहीं की। स्पष्ट है कि कोई न कोई कमी रही ही होगी । हिंदू धर्म में 5 करोड़ लोग अस्पृश्य और 5-10 करोड़ लोग चोरी-चकारी करने वाले हैं तो आखिर क्यों? इस धर्म में ही कोई कमी है यही इसकी वजह है।
इस नये कार्य को आजमाकर देखें। उसका अध्ययन करें। ऐसे अध्ययन में शामिल हों। इस सुमंगल काम में शरीक होने के लिए मैं आपका अभिनंदन करता हूं।