200 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
बारे में आदर करना है। लेकिन हम बुद्ध जयंति केवल इसीलिए मनाते हैं कि भारत में समाज का पतन न हो। इसीलिए, बुद्ध की शिक्षा स्वीकारने के लिए लोगों से कहने से पहले बौद्ध धर्म और हिंदू धर्म का फर्क उन्हें ठीक से समझाया जाना चाहिए। चतुर्वणीय मूर्तिपूजा और आध्यात्मिक सिद्धांत के स्वरूप में सामाजिक भेदभाव पर आधारित हिंदू धर्म बना है। लोगों के सामाजिक पतन के लिए और राष्ट्र के ”ास के कारण बने ब्राह्मणतंत्र में और आज के हिंदू धर्म में मुझे तो कोई फर्क दिखाई नहीं देता। हिंदू धर्म में शांति, एकता नहीं इसकी वजह चतुर्वणीय व्यवस्था पर आधारित हिंदू धर्म है इस बात को ज्यादातर हिंदू लोग मान रहे हैं। लेकिन चतुर्वणीय व्यवस्था पर आधारित धर्म के इस चौखटे को कैसे तोड़ना है, हिंदू धर्म में शांति और एकता की स्थापना कैसे करनी है यह बात कोई नहीं जानता। सही-गलत के बारे में सोच कर अनुचित बातों का त्याग न करने का एक ही कारण है कि इस अनुचितता के कारण अर्थात् कि चतुवर्णीय के कारण हिंदुओं का फायदा हो रहा है ऐसा लगता है।
सभी हिंदुओं से मैं यही कहना चाहता हूं कि वे इन पोंगापंथी मान्यताओं से, वर्णाश्रम पद्धति से छुटकारा पाएं। लेकिन यह होगा कैसे? क्योंकि वे वेदाज्ञा को प्रमाण मानते हैं। और वेदों में वर्णाश्रम पद्धति को श्रेष्ठ बताया गया है। धर्म में सुधार होना चाहिए ऐसा केवल कहना भर काफी नहीं है। उसके लिए आचार-विचारों में आमूलचूल बदलाव लाना जरूरी है। उसके बगैर सुधार आना संभव ही नहीं है। उसके बिना सुधार की आशा करना ही व्यर्थ है।
बौद्ध धर्म से द्वेष करने वाले ब्राह्मणों से मैं यही पूछना चाहता हूं कि बुद्ध को शुरुआत में जो भिक्षु मिले थे वे कौन थे? उनमें से 90 प्रतिशत ब्राह्मण थे। कुछ हिंदू लोगों का कहना है कि बौद्ध धर्म को स्वीकार करना हो तो करो, लेकिन इसके लिए ब्राह्मणतंत्र को क्यों कोसा जाता है? इसका जवाब बहुत आसान है। वर्णाश्रम धर्म पर आधारित ब्राह्मणतंत्र पर, हिंदू धर्म पर प्रहार किए बगैर, उसका स्वरूप खोल कर बताए बगैर बौद्ध धर्म का प्रसार संभव नहीं। बौद्ध धर्म की प्रगति की राह का वह रोड़ा बहुत बड़ा है। साफ पानी और गंदे पानी के प्रवाहों को अगर इकठ्ठा बहने दिया गया तो साफ पानी गंदा हो जाएगा। इसी प्रकार बौद्ध धर्म के सही सिद्धान्तों के साथ हिंदू धर्म के गंदे पानी को बहने नहीं देना चाहिए।
बौद्ध धर्म की तरह ही हिंदू धर्म में भी अहिंसा पर जोर दिया गया है यह बात सही है। लेकिन वर्णाश्रम पद्धति को हिंदू धर्म की बुनियाद बनाए जाने के कारण एक वही बात हिंदू धर्म का धिक्कार करने के लिए काफी है। आज हिंदू धर्म में जहां देखो वहां ढोंग है। ब्राह्मण लोग मंदिरों में इसीलिए रहते हैं क्योंकि उन्हें वहां एशोआराम की जिंदगी व्यतीत करने का मौका मिलता है, न कि इसलिए कि वहां रह कर वे भगवान