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कार्यकुशल न भी हों तो चलेगा, लेकिन लोग निष्ठावान होने
चाहिए
दिनांक 14 जनवरी, 1946 के दिन सोलापुर मैं अथाह जनसागर के सामने डॉ. बाबासाहेब अम्बेडकर ने जोरदार भाषण दिया। उन्होंने कहा,
अपने अस्पृश्य भाइयो-बहनो को चुनावों के संदर्भ में दो शब्द कहने की मुझे वैसे तो जरूरत नहीं है, लेकिन कुछ लोगों के द्वारा आग्रह किए जाने से मुझे बोलना पड़ रहा है। अपने समाज पर मुझे पूरा विश्वास है। पूरे अछूत समाज का शेड्यूल्ड कास्ट फेडरेशन को समर्थन है इस बारे में मुझे कोई शक नहीं। अस्पृश्य समाज किसी भी अन्य समाज की तुलना में ज्यादा समझदार हुआ है। वह अपना हित-अहित जानता है। हमारा संगठन इतना मजबूत है कि दिल्ली में बैठे-बैठे मैं अगर इशारा करता हूं तब भी मेरा पूरा समाज मेरे आदेश का निष्ठा के साथ पालन करता है।
कुछ लोगों को आपत्ति है कि मध्य प्रांत की 6 सीटें काँग्रेस को कैसे मिलीं? जवाब में, मैं कहूंगा कि केवल मैदान में उतरना ही बाजी मार लेना नहीं होता। हम अस्पृश्यों का अभेद किला मुंबई प्रांत में है। उसे अगर विपक्ष जीत ले तो हम पगड़ी उतार कर शरण आएंगे।
काँग्रेस का प्रचार आज हवाई जहाज, रेल और मोटरगाडि़यों के सहारे जोरदार तरीके से चल रहा है। मैं उनसे सवाल पूछना चाहता हूं कि,
घमंड और बड़बोलेपन के साथ देश की ‘‘सारी जनता अपने साथ है’’ कहने वाले इन लोगों को हवाई जहाज में उड़ने की क्या षरूरत है? ये लोग पूरे देश को क्यों मथ रहे हैं? क्यों इतना ह८ा-गु८ा मचा रहे है? चुनाव प्रसार के लिए, मैं केवल चार-पांच जगहों पर ही गया। मैं पूछता हूं कि जनता अगर काँग्रेस के साथ है तो यूं रुपया लुटाते हुए हवाई जहाज, रुपया और गाडि़यां लेकर पोतराज की तरह घूम क्यों रहे हैं?
आने वाले चुनाव कोई बच्चों का खेल नहीं हैं। आगामी चुनाव एक संग्राम है, युद्ध है। कौरव-पांडवों के युद्ध की तरह ही यह लड़ाई भी होगी। कौरव-पांडवों का युद्ध टालने के लिए कृष्ण ने बीच-बचाव किया, लेकिन दुर्योधन ने कृष्ण को घमंड से कहा - सुई की नोक पर लगी जितनी मिट्टी भी पांडवों को नहीं मिलेगी। युद्ध टालने के लिए सुलह कराने की कोशिश मैंने गांधीजी को खत लिख कर की। अपना मान-सम्मान भुला कर, अपने नेता होने को भुला कर मैंने उन्हें खत लिखा। मैं नहीं चाहता था कि