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और अनुसंधानात्मक स्थलों की यात्राएं आयोजित की जाती हैं। चर्चा (मंथन) साहित्य और विज्ञान के विभागों की स्थापना की गई है और कई छात्र इनका लाभ ले रहे हैं।
केवल छात्रों के लिए ही नहीं, आम जनता के लिए भी कॉलेज द्वारा शिक्षा देने की कोशिश की जा रही है। इस दिशा में यूनेस्को द्वारा सुझाए गए ‘अनाज और जनता’ विषय पर एक व्याख्यानमाला आयोजित की गई थी। यह व्याख्यानमाला बहुत लोकप्रिय हुई और अखबारों ने भी उसका स्वागत किया । कॉलेज और जनता के बीच का यह संबंध इसी तरह बनाए रखने की कोशिश कॉलेज करेगा।
अभी यह कॉलेज आरंभिक स्थिति में है लेकिन किसी क्षेत्र में भी उन्नीस नहीं। बल्कि, कॉलेज की हर बात में जिंदादिली है और वह बड़ी तेजी से बढ़ता जा रहा है।
लोगों की आंखों में चढ़ जाए ऐसा कुछ अगर कॉलेज ने कमाया हो तो उसका सारा श्रेय केवल कॉलेज को ही जाए यह मैं नहीं कहता। इसके और भी हिस्सेदार हैं। और इसके लिए सोसाइटी सबके प्रति कृतज्ञ है। इसकी मैं घोषणा करता हूं। इस सफलता के हिस्सेदारों में मेरे जो स्नेही हैं उनमें हैदराबाद के पूर्व शिक्षा मंत्री राजा धोंडी राज बहादुर एक हैं। उनकी मदद के बगैर कॉलेज का खुलना संभव ही नहीं था। उनके बाद हैदराबाद के आज के मुख्यमंत्री एम. के. वेलोदी, अर्थमंत्री सी. वी. एस. राव, रेवेन्यू मंत्री शेषाद्री, शिक्षा मंत्री रामकृष्ण राव, साथ ही मेरे सहयोगी मित्र गोपालस्वामी अयंगार, मिनिस्टर फॉर स्टेट, उस्मानिया विश्वविद्यालय के कुलपति नवाब अलीयावर जंग बहादुर, हैदराबाद शेड्यूल्ड कास्ट ट्रस्ट फंड के सचिव आयु. आबासे, औरंगाबाद के तत्कालीन कलक्टर आयु. राजवाड़े, लैंड एक्वीजीशन अफसर अश्पुत्रे, हैदराबाद स्टेट काँग्रेस के अध्यक्ष बिंदू, पी. डब्ल्यू. डी. मंत्री नवाबजंग यावरजंग, पी. डब्ल्यूडी. के आर्किटेक्ट दवे इन सबके प्रति मैं तहेदिल से आभार प्रकट करता हूं। आभार प्रकट करते समय मैं कॉलेज के प्रिंसिपल और अन्य सहयोगियों को नहीं भूल सकता क्योंकि, उन्होंने अपना घर-बार मुंबई में छोड़ औरंगाबाद आने का अभूतपूर्व त्याग किया है।
फिलहाल इस कॉलेज में बी. ए. और इंटर साइंस तक की पढ़ाई होती है। लेकिन अगले वर्ष साइंस उपाधि तक की कलासिय्स खोलकर उसे भी पूरे कॉलेज का स्वरूप दिया जाएगा।
फिलहाल कॉलेज किराए के बंगले में चलाया जा रहा है। ये बंगले कैंटोनमेंट विभाग में होने के कारण दो महीनों के नोटिस पर कभी भी जगह खाली कराने के आदेश मिलिट्री हमें दे सकती है। हालात बेहद संवेदनशील हैं। इन हालात के कारण कॉलेज के स्थायी अस्तित्व के बारे में संदेह पैदा होता है। कॉलेज की जरूरत के मुताबिक वर्तमान जगह बहुत ही छोटी है। साथ ही छात्र होस्टल की मांग कर रहे हैं। क्योंकि स्थानीय छात्रों से बाहर से आने वाले छात्रों की संख्या अधिक है। और शहर में अन्यत्र कहीं रहने की