206 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
व्यवस्था नहीं है। इन सभी कारणों से कॉलेज की अपनी इमारत का होना अत्यंत जरूरी हो गया है। उस नजरिए से सोसाइटी ने कॉलेज की इमारत बनाने का काम भी शुरु कर दिया है। बारह सौ छात्रों के लिए उपयुक्त क्लासें, एक सभागृह और एक होस्टल होगा। इसके लिए सोसाइटी ने शहर से ढाई कि. मी. की दूरी पर एक पचपन एकड़ जगह
खरीदी है। इस जगह के आसपास का स्थान रमणीय और सुंदर है और पास ही तैरने की और बोटिंग की सुविधा भी उपलब्ध है। औरंगाबाद की मशहूर पनचक्की भी वहीं है।
इस प्रकार यह कॉलेज हैदराबाद संस्थान और औरंगाबाद शहर दोनों को प्रख्यात बनाने का सोसाइटी का मंसूबा है। हालांकि, कॉलेज को ऐसी स्थिति प्राप्त होगी या नहीं इस बारे में सोसाइटी को चिंता लगी रहती है। कॉलेज के इस पहले साल में ही सोसाइटी को 1 लाख 7 हजार रुपयों की कमी झेलनी पड़ी। छात्रों की संख्या बढ़ने के कारण इस वर्ष भी थोड़ी कमी झेलनी होगी। इसके अलावा कुछ अन्य कारण हैं जिनकी वजह से अनिश्चित काल तक इस प्रकार की कमी को झेलना पड़ेगा और शायद कॉलेज चलाने की सोसाइटी की कोशिश असफल होगी। वे कारण बेहद गंभीर हैं और बहुत कम लोग उनके बारे में जानते हैं। इसलिए मैं चाहता हूं कि उन कारणों को स्पष्ट करना आवश्यक है।
पहला कारण है उस्मानिया विश्वविद्यालय के इंटर तक के कॉलेज का अस्तित्व। पीपल्स एजुकेशन सोसाइटी द्वारा कॉलेज खोले जाने से पहले से ही उस्मानिया विश्वविद्यालय का यह कॉलेज यहां है यह सच है। लेकिन दोनों कॉलेज ठीक से चलें इतनी संख्या में छात्रों के न होने के कारण वह कॉलेज सोसाइटी के कॉलेज से प्रतिस्पर्धी की तरह पेश आता है। संस्थान में ऐसे कई शहर हैं जहां इमारत की सुविधा है लेकिन कॉलेज नहीं हैं। संस्थान की प्रजा तथा अपने फायदे के नजरिए से ऐसे ही किसी शहर में इस कॉलेज को स्थानांतरित करना उस्मानिया विश्वविद्यालय के लिए कठिन नहीं है। उस्मानिया विश्वविद्यालय अपना कॉलेज किसी और शहर में ले जाएगी ऐसा सोसाइटी से कहा गया था। लेकिन अब इस कॉलेज को औरंगाबाद शहर में ही रखने की उस्मानिया विश्वविद्यालय की कोशिश जारी है। विश्वविद्यालय के सभी छात्रों की व्यवस्था सोसाइटी के कॉलेज में हो सकती है, जबकि उस्मानिया विश्वविद्यालय के कॉलेज की हालत इतनी खस्ता है कि जगह की कमी के कारण वे अपनी लैबोरेटरी कालेअरक औरंगाबाद के निजाम सरकार का पुराना महल) की इमारत में ले जा रहे हैं। पता चला है कि, इस काम के लिए 10,000 रुपए मंजूर किए गए हैं। लेकिन कॉलेज के लिए योग्य सरकारी इमारतें होने वाले मराठवाड़ा क्षेत्र के मोमिनाबाद शहर में ही कॉलेज और लैबोरेटरी साथ में ले जाना क्या अधिक सुविधाजनक नहीं होगा? इस प्रकार एक और जिले में उच्च शिक्षा की सुविधा उपलब्ध हो सकेगी और सोसाइटी के कॉलेज को भी बेकार की प्रतिस्पर्धा से मुक्ति मिलेगी।