208 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
उस्मानिया विश्वविद्यालय के कॉलेजों में प्रोफेसरों की तनख्वाह का अनुपात निःसंशय बहुत अधिक है। उस्मानिया विश्वविद्यालय ने सोसाइटी के कॉलेज के लिए तनख्वाह का जो अनुपात तय किया है वह सोसाइटी द्वारा अपने प्रोफेसरों के लिए तय की गई तनख्वाह की रकम से कुछ कम है यह सच है, लेकिन पड़ोस के नासिक और खानदेश जिलों के कॉलेज की फीस के फर्क और तनख्वाह के अनुपात के साथ तुलना करें तो यह अनुपात बहुत अधिक है और वह कॉलेज पर आर्थिक बोझ ही बन जाता है।
चौथा कारण सरकारी ग्रांट के बारे में है। हैदराबाद संस्थान की कॉलेज शिक्षा उस्मानिया विश्वविद्यालय का एकाधिकार ही हो गया है। उच्च शिक्षा की सभी जिम्मेदारियों से खुद को मुक्त रखते हुए हैदराबाद सरकार ने वह जिम्मेदारी उस्मानिया विश्वविद्यालय को सौंप रखी है। सरकार की जिम्मेदारी केवल संस्थान की कॉलेज शिक्षा के लिए उस्मानिया विश्वविद्यालय को ग्रांट देना भर रह गई है। पीपल्स एजुकेशन सोसाइटी को उम्मीद थी कि इसी रकम से अपने कॉलेज को भी ग्रांट मिलेगी। लेकिन उस्मानिया विश्वविद्यालय का युक्तिवाद है कि संलग्न कॉलेजों के वर्चे चलाना भर उनकी जिम्मेदारी है और अन्य विश्वविद्यालयों से संलग्न कॉलेजों का इस ग्रांट पर कोई अधिकार नहीं। इसी कारण कि सोसाइटी का कॉलेज अन्य विश्वविद्यालय से संलग्न होने के कारण उसे ग्रांट देने से उस्मानिया विश्वविद्यालय द्वारा इनकार किया गया। सरकार का यह भी कहना है कि हम जितनी ग्रांट देने के लिए बंधे हैं उतनी ग्रांट हम उस्मानिया विश्वविद्यालय को दे चुके हैं। इसलिए सोसाइटी के कॉलेज के ग्रांट की जिम्मेदारी अपने ऊपर नहीं है और हम और कुछ कर नहीं सकते हैं। इससे हुआ यह है कि सभी तरह के सालाना घाटे का बोझ सोसाइटी को वहन करना पड़ रहा है।
परिणामस्वरूप ये सभी कारण घातक हैं और अब कॉलेज के सामने मुश्किल समस्या
खड़ी हुई है। कॉलेज सभी ओर से मुश्किलों से घिरा है और उनसे पार पाने में असमर्थ है। कॉलेज को सालाना ग्रांट देने से मना किए जाने के कारण, बहुत कम फीस लिए जाने के कारण और प्रतिस्पर्धी कॉलेज के कारण आर्थिक स्थितियों पर प्रतिकूल असर हो रहा है। अधिक वेतन के कारण खर्च का बोझ ज्यादा ही बढ़ गया है।
कॉलेज का भविष्य पूरी तरह इन मुश्किलों के हल होने पर निर्भर है। मुझे उम्मीद है कि उस्मानिया विश्वविद्यालय और संस्थान की सरकार की संयुक्त कोशिश से ये मुश्किलें दूर की जाएंगी और कॉलेज के भविष्य को सुरक्षित और निःशंक किया जाएगा। सोसाइटी को कोई खास छूट नहीं चाहिए। इस कार्य के लिए अच्छा और मुक्त क्षेत्र मिले यही सोसाइटी चाहती है।
आधिकारिक तौर पर मुझे पता नहीं है, लेकिन मैंने सुना है कि हमारी सोसाइटी के कॉलेज को सालाना ग्रांट देना हैदराबाद सरकार ने तय किया है। यह बड़े खुशी की खबर