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है और अगर वह सच हो तो इस मदद के लिए मैं संस्थान के मंत्रियों का बहुत आभारी रहूंगा। कुलपति द्वारा कॉलेज की राह की अन्य अड़चनें दूर किया जाना ही अब बाकी होगा। मैं उनसे विनति करता हूं कि उस्मानिया विश्वविद्यालय का कॉलेज औरंगाबाद से किसी और जगह स्थानांतरित किया जाए और मुंबई राज्य के नजदीक के जिले की कॉलेज फीस के अनुपात में हमें फीस में बढ़ोतरी करने की इजाजत दें। उम्मीद है कि मेरी विनति पर वे जरुर विचार करेंगे।
सिर पर बड़ी जिम्मेदारी उठाते हुए सोसाइटी ने यह कॉलेज शुरू किया है। यह जिम्मेदारी कितनी बड़ी है इसके बारे में बहुत कम लोग जानते हैं। हैदराबाद संस्थान की उन्नति के लिए निजाम सरकार द्वारा इकठ्ठा किए गए एक करोड़ रुपयों के ‘शेड्यूल्ड कास्टस् ट्रस्ट फंड’ से 12 लाख रुपयों का कर्ज लेकर सोसाइटी द्वारा यह कॉलेज वोला गया है। हमें बिना ब्याज का कर्ज देने के लिए मैं फंड के बोर्ड के प्रति कृतज्ञ हूं। उपकार माने जाने योग्य ही यह काम होने के बावजूद सोसाइटी इस बात को नजरंदाज नहीं कर सकती कि सालाना 50,000 रुपयों की किस्त से इस कर्ज को लौटाना भी है। 1956 से कर्ज वापसी की किस्त देनी है। 12 लाख रुपयों के इस कर्ज से कॉलेज की इमारत और अन्य सामान खरीदना था। अब तक फर्नीचर और उपकरणों पर 3 लाख रुपए खर्च हुए हैं। इन्हें अगर कर्ज की मूल रकम से घटाया जाए तो करीब 9 लाख रुपए सोसाइटी के हाथ में बचते हैं। अनुमान है कि कॉलेज की इमारत के लिए 20 लाख रुपयों की जरूरत पड़ेगी। यानी कि सोसाइटी के बजट में 11 लाख रुपयों की कमी है। सोसाइटी का अपना कोई जरिया नहीं है जिससे कि इतनी बड़ी रकम खड़ी की जाए। इस घाटे को पूरा करने के लिए सोसाइटी को लोगों के चंदे के ऊपर निर्भर रहना होगा। सोसाइटी द्वारा अपनाया गया कार्य पूरी तरह से राजनीति रहित है। यह कार्य पूरी तरह से शैक्षिक और सांस्कृतिक है। इच्छा और हैसियत रखने वाले किसी भी राजनीतिक दल के व्यक्ति के लिए इस कार्य में मदद देना संभव है। सोसाइटी की ओर से मैं हैदराबाद संस्थान के मराठवाड़ा और औरंगाबाद की जनता से तथा हैदराबाद संस्थान से बाहर की जनता से मैं अपील करता हूं कि इस शैक्षिक कार्य को बढ़ावा देने के लिए वे उदार हृदय से चंदा दें। उम्मीद है कि काफी लोग मेरी विनति का सम्मान करते हुए अधिक से अधिक चंदा देंगे। इस बात से पता चलता है कि अपने लक्ष्य को पाने के लिए सोसाइटी कितने कठिन मार्गों से गुजर रही है। सोसाइटी पर दोहरा बोझ है। कॉलेज की इमारत पूरी करने के लिए 11 लाख रुपए और कर्जा चुकाने के लिए सालाना 50 हजार रुपयों की किस्त लौटाने के लिए रकम का प्रबंध करना है। इसके बावजूद इमारत बनाने के लिए अनुकूल स्थितियां पैदा होकर रुपया मिलने तक सोसाइटी रुकेगी नहीं। इमारत निर्माण का काम सोसाइटी को तुरंत शुरू करना है। मुझे आशा है कि सोसाइटी के निश्चय और चिंता से सभी अवगत होंगे और समझेंगे। काम शुरु होने के बाद काम को देखकर लोग चंदा देंगे