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मैं करना चाहता था वह कर नहीं पाता ।
1942 में एक बार फिर मुझे ऐसे ही वाकए का सामना करना पड़ा। आर्थिक रूप से संपन्नता देने वाली और दस साल की नौकरी के बाद बाकी उम्र आराम से गुजार सकूं ऐसी हाइकोर्ट के जज की नौकरी मुझे दी गई। वायसराय की कौंसिल में भी मुझे जगह देने का आश्वासन दिया गया। मैंने अपने जीवन का उद्देश्य आंखों के सामने रखते हुए दूसरी नौकरी की। हर किसी को अपने लोगों की सेवा करने में अपना जीवन बिताना चाहिए और सेवा करते हुए ही मृत्यु को प्राप्त हो जाना चाहिए।
1947 में केंद्र सरकार में, मैं शामिल हुआ। मेरे कुछ आलोचकों ने कहा कि मैं काँग्रेस में शामिल हो गया हूं। उनकी आलोचना का जवाब मैंने अपने लखनऊ के भाषण में दिया है। अपने उस भाषण में अपने देश-बंधुओं से मैंने कहा है कि पानी के रेले से बह जाने वाले मिट्टी के ढेले की तरह मैं दरदरा नहीं हूं नदी के प्रवाह को ही बदल देने वाली चट्टान की तरह मैं हूं। मैं कहीं भी रहूं, किसी की संगत में रहूं मैं अपनी विशिष्टता कभी नहीं छोड़ सकता। किसी अच्छे काम के लिए अगर कोई मदद मांगे तो मैं खुशी से उनकी मदद करूंगा। पिछले चार सालों तक मातृभूमि की सेवा करने में मैंने पूरी ईमानदारी से और पूरी सामर्थ्य के साथ काँग्रेस का हर तरह से सहयोग किया। लेकिन पूरे समय मैंने अपने को काँग्रेस में विलीन होने से अलग रखा है। जो लोग अपने दिए शब्द के साथ और अपने कर्तव्य के साथ ईमानदार रहते हुए अस्पृश्यों के काम में मदद करने की इच्छा रखते हैं मैं उनकी बड़ी खुशी के साथ मदद करूंगा जो केवल मीठा बोलने वाले और मीठे झांसे देने वाले हैं और जिनका अंदरूनी उद्देश्य और कृति हमारे लोगों के हितों के खिलाफ होती है उनकी मैं कभी भी मदद नहीं करूंगा।
अब, आगामी आम चुनावों के बारे में बताना हो तो, शेड्यूल्ड कास्ट के लोग इन चुनावों को जीने-मरने की लड़ाई मानकर पूरी ताकत के साथ लड़ें। अपने उम्मीदवारों को जिताने के लिए अपनी पूरी ताकत लगा दें। दुनिया में इंसान को ताकत मिलती है तो धन से और लोगों के बल से। हम अल्पसंख्यक हैं और हम धनवान भी नहीं हैं। हर गांव में हमारी संख्या कुल जनसंख्या की तुलना में 5 प्रतिशत भी नहीं है। 95 प्रतिशत लोगों की संघशक्ति और उनकी संपत्ति की तुलना में हम बहुत कमजोर हैं। पुलिस खासकर उच्चवर्णीय लोगों में से ही होने के कारण हमारी सही शिकायतों को नहीं सुनती। उल्टे, शिकायत करने पर हमें ही परेशान किया जाता है। दरिद्रता के कारण अधिकारियों को अपनी तरफ नहीं कर पाते हैं। लेकिन हमें एक शक्ति प्राप्त हो सकती है और वह है राजनीतिक शक्ति। हमें इस शक्ति को प्राप्त कर ही लेना चाहिए। इस शक्ति से लैस होकर हम अपने लोगों के हितों की रक्षा कर सकते हैं।
इस देश ने जो आजादी पाई उस आजादी ने क्या आपको शासन का भरोसा दिलाया