280 27-10-1951 मैं नदी की धारा मोड़ने वाले मजबूत पहाड़ की तरह हूं - रामदासपुरा (जलंधर) - Page 236

 217

अर्थ बताने वाले, मोटे हरफों वाले और एक-दूसरे से कोई संबंध न होने वाले शब्दों का अर्थ व्यक्त कर रहे हैं।

ऐसे हालात में हमें ‘हम ये चुनाव हारेंगे’ ऐसा नहीं सोचना है। हमारे पुराने दुश्मन

. काँग्रेस शक्तिविहीन हो चुकी है। यह सुनिश्चित है स्वाभिमान और एकता के बल पर फेडरेशन को सफलता मिलेगी। बस हमें मन में पक्का कर लेना चाहिए और उसी निश्चय के साथ मैदान में उतरना चाहिए, कोशिश करनी चाहिए। मैं आप सभी भाइयों-बहनों का आह्नन करता हूं कि मतदान के दिन आप अपने सभी काम छोड़ कर अपने मतदान जरुर करें।

काँग्रेस हममें फूट ना डाले इसके लिए शेड्यूल्ड कास्ट फेडरेशन के लोगों को पहरा देना चाहिए। काँग्रेस के बड़बोले और अंटसंट प्रचार के चक्कर में उन्हें नहीं आना चाहिए। इसी प्रकार आपको भगवान जिस हालत में रखे, उसी में संतोष करने वाली मानसिकता का भी त्याग करना होगा। आपको हमेशा सतर्क रहना होगा। आरक्षित सीटें हमारे लिए केवल दस सालों के लिए हैं बात को हमें हर वक्त याद रखनी है। अस्पृश्यता का पूरी तरह खात्मा होने तक आरक्षण बना रहे ऐसी मेरी इच्छा थी। सरदार पटेल ने सदन के अंदर और बाहर बड़े आवेश के साथ मेरे इस प्रस्ताव का विरोध किया। सरदार पटेल की बात छोड़ भी दें तो काँग्रेस की ओर से नियुक्त हरिजनों के 30 प्रतिनिधियों की हिम्मत नहीं हुई कि वे मेरे प्रस्ताव का समर्थन करें। सरदार पटेल का पिछलग्गू काँग्रेस के ये भेदिए और क्या कर सकते हैं? चुनाव के टिकट के खूंटे से बंधे थे। इन मौकापरस्त और सत्ता के लालची लोगों से हम और कोई उम्मीद नहीं कर सकते। आरक्षण केवल दस सालों तक ही रहेगा। इन दस सालों के बाद हम क्या करने वाले हैं? हमारे पास अगर मजबूत संगठन न हो तो देश की राजनीति में हमारा कोई स्थान नहीं रहेगा। अछूत अगर एक जाति में संगठित हो पाए तो हम राजनीति में कोई स्थान प्राप्त कर सकते हैं। अपने संगठन को मजबूत और एकजुट करने के लिए हमें दस साल तक इंतजार नहीं करना चाहिए। हमें अभी से संगठन को मजबूत करना होगा। कल और परसों से भी नहीं - आज से ही। इन दस सालों में हम अगर अपना संगठन मजबूत कर खड़ा नहीं कर सके, उसे सक्रिय नहीं कर सके तो दस सालों के बाद मनुस्मृति-राज स्वीकारने का दुर्भाग्य हमारे हिस्से में लिखा जाएगा। हमारे पास ऐसा संगठन पहले से है। फेडरेशन ही हमारा संगठन है। हमें बस उसे मजबूत करना होगा। पेड़ पहले से रोपा गया है। हमें केवल उसमें पानी देकर देखभाल करनी है। चुनाव आयुक्त द्वारा हमारे फेडरेशन को अखिल भारतीय संगठन के रूप में मान्यता मिली हुई है। हमें नया घर नहीं बनाना है। घर पहले से है। हमें बस इतना ही करना होगा कि उस घर को हमें व्यवस्थित तरीके से अच्छी हालत में रखना होगा। अभी से अगर हम जोरदार कोशिश नहीं करेंगे तो संतोष कर बैठे रहे तो हो सकता है ऐसे हालात का सामना करना पड़े कि जिसमें बेघर होकर