281 28-10-1951 हमारे सच्चे प्रतिनिधि अगर संसद तथा राज्यसभा में हों तभी वे हमारे हित में लड़ सकेंगे - लुधियाना - Page 238

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हमारे सच्चे प्रतिनिधि संसद तथा राज्यसभा में हों तभी हमारे हित

में लड़ सकेंगे

दिनांक 28 अक्तूबर, 1951 के दिन लुधियाना में डॉ. बबासाहब अम्बेडकर का भाषण हुआ।

प्रिय बहनों और भाइयों,

अपने लोगों के साथ बातचीत करने के लिए लुधियाना आने का यह मेरा पहला ही मौका है। इससे पूर्व यहां आने की कई योजनाएं मैंने बनाईं, लेकिन किन्हीं कारणों से मैं आ नहीं पाया था। आप सब लोग एक जगह इकठ्ठे हुए हैं, यह कितना मंगलमय प्रसंग है।

आप जानते हैं कि दो-तीन महीनों के बाद चुनाव होने वाले हैं और कई दल उसमें हिस्सा लेने वाले हैं। इस बार चुनावों में शे. का. फे. भी अपने उम्मीदवारों को उतारने वाला है। विधानसभा और संसद में शेड्यूल्ड कास्ट के लिए रखी सभी आरक्षित जगहें और जहां हमारे मतदाता काफी संख्या में हैं ऐसे कुछ क्षेत्रों से हम चुनाव लड़ने वाले हैं। मुझे उम्मीद है कि हमारे उम्मीदवार जीतेंगे। हमारे उम्मीदवारों की जीत खास कर हमारे मतदाताओं पर ही निर्भर है। हमारे सभी मतदाता अगर अपने उम्मीदवार को ही वोट देंगे तो मुझे यकीन है कि वे जीत जाएंगे। इसीलिए शेड्यूल्ड कास्ट और अन्य पिछड़े लोगों का शेड्यूल्ड कास्टस् फेडरेशन यह एक ही संगठन है। इस संगठन के उम्मीदवारों को ही शेड्यूल्ड कास्टस् के सभी लोग वोट दें ऐसी मैं आप सबसे विनति करता हूं।

भारत पर जब अंग्रेजों का शासन था तब उन्होंने हमें कैसे धोखा दिया यह मैं आपको बताता हूं। भारत से सैंकड़ों मील दूर रहने के बावजूद भारत में अपने शासन की स्थापना करने में वे सफल रहे। पहले ईस्ट इंडिया कंपनी भारत में आई। तब उसका मंसूबा केवल व्यापार करने का था। बाद में धीरे-धीरे उनके मन में यहां अपना राज्य स्थापित करने की इच्छा पैदा हुई। इस उद्देश्य की पूर्ति के लिए उनके पास कहां से सामर्थ्य आई? भारत में उनकी सेना नहीं थी। अपनी सेना नहीं होते हुए भी भारत के सभी राजाओं-महाराजाओं को जीतने में वे सफल कैसे रहे यह कोई नहीं बता सकता। लेकिन अब मैं इस सवाल का जवाब देने वाला हूं। अपने ही देश में जो लोग अस्पृश्य थे उन शेड्यूल्ड कास्ट लोगों की मदद से अंग्रेज लोग भारत के शासक बने। ये अस्पृश्य लोग निरक्षर थे। सवर्ण हिंदुओं

डॉ. बाबासाहेब अम्बेडकररांची भाषणेः संपादक - मा. फ. गांजरे, खंड 7, पृष्ठ 57-65