281 28-10-1951 हमारे सच्चे प्रतिनिधि अगर संसद तथा राज्यसभा में हों तभी वे हमारे हित में लड़ सकेंगे - लुधियाना - Page 239

220 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

का उनके साथ का व्यवहार अपमानजनक था। पेट पालने का कोई साधन उनके पास नहीं था। उन्हें हमेशा सवर्ण हिंदुओं की दया पर निर्भर रहना पड़ता था। जो हुआ वह सब सही था यह मेरे कहने का मतलब नहीं है। मैं किसी और मुद्दे पर जोर देना चाहता हूं। मैं इस बात की ओर आप सबका ध्यान दिलाना चाहता हूं कि भारत में शासन की स्थापना करने में हमने जिन लोगों की मदद की उन्होंने भी हमारे साथ बुरा व्यवहार किया। अंग्रेजों की खातिर हमारे पूर्वजों ने लड़ाइयों में अपनी जानें गंवाई और उसके बदले में हमें क्या मिला? किसका लाभ हुआ? शेड्यूल्ड कास्टस् के लोगों द्वारा मदद प्राप्त करने के बावजूद उससे होने वाले लाभ ब्राह्मण और अन्य सवर्ण हिंदुओं ने उठाए। अंग्रेजों ने उनके बच्चों को ही पढ़ाया और हर तरह की आर्थिक मदद उन्हें दी। हमारे लोगों की तरफ ध्यान ही नहीं दिया गया। परिणामस्वरूप गरीब, बेचारे शेड्यूल्ड कास्ट के लोगों की बदौलत सवर्ण हिंदू संपन्न हुए। अस्पृश्य लोग जैसे थे वैसे ही रहे। आज तक शेड्यूल्ड कास्ट के परिवार सुसंपन्न क्यों नहीं हैं? उनके बच्चे पढ़े-लिखे क्यों नहीं हैं? इसका कारण यही है। परिणामस्वरूप सेना, पुलिस और प्रशासकीय सेवा के सभी महत्वपूर्ण पद सवर्ण हिंदुओं के हाथ में ही हैं। हमारी उन्नति के लिए अंग्रेजों को कुछ करना चाहिए था लेकिन उन्होंने हमारे लिए कुछ नहीं किया। 1858 में विद्रोह हुआ। क्या कारण थे उस विद्रोह के पीछे? कारण यही थे कि हमारे लोगों के लिए कुछ करने से अंग्रेज चूक गए। सेना में शामिल हमारे लोगों के सामने उनके खिलाफ विद्रोह करने के अलावा कोई चारा ही नहीं रहा। विद्रोह जब दब गया तो पता चला कि सेना में शामिल हमारे लोगों ने अंग्रेजों के खिलाफ विद्रोह किया था, इसलिए अंग्रेजों ने हमारे लोगों की सेना में भर्ती बंद कर दी। उनकी जगह हिंदू और राजपूतों की सेना में भर्ती की गई। इस प्रकार हम लोगों की आमदनी का प्रमुख जरिया समाप्त हो गया। अंग्रेजों के इस देश में आने से पूर्व अस्पृश्य जिस हालत में थे 1947 में जब अंग्रेजों ने भारत छोड़ा तब भी वैसी ही हालत में थे। सत्ता का हस्तांतरण करते हुए अंग्रेजों ने सारी सत्ता सवर्ण हिंदुओं के हाथ में दी। हम लोगों के हाथ कुछ नहीं आया। न्याय के बारे में जिनके मन में बिल्कुल आस्था नहीं ऐसे हिंदू सवर्णों की दया पर हमें छोड़ कर अंग्रेज चले गए। इससे हम कल्पना कर सकते हैं कि गरीब अस्पृश्यों के साथ सवर्णों का क्या व्यवहार रहा होगा। आज तक हम पिछडे क्यों रहे, उसका यह कारण रहा है। अब मैं आपके सामने एक प्रश्न उपस्थित करना चाहता हूं। क्या अभी भी आप उसी तरह पिछड़े हुए रह कर सवर्ण हिंदुओं के गुलाम बन कर रहना चाहते हैं? आर्य भारत में आए तब से वर्णव्यवस्था लागू हुई। इंसानों को उनके जन्म के आधार पर सामाजिक स्थान दिया जाने लगा। कुछ लोगों को ब्राह्मण कहा गया, कुछ क्षत्रिय बने, कुछ वैश्य बने, कुछ लोग शूद्र बने और अन्य अस्पृश्य बने। इस श्रेणी के अनुसार अस्पृश्य सबके नीचे और समाज से सर्वथा अलग थे। सवर्ण हिंदू और अस्पृश्यों के बीच के संबंध पैर और जूती जैसे थे। घर में प्रवेश करते समय जूता बाहर ही खोल