234 14-1-1946 क्षमतावान न भी हों तो चलेगा, लोग निष्ठावान होने चाहिएं - सोलापुर - Page 24

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सबका भविष्य उज्ज्वल हो, इसीलिए हम सत्ता चाहते हैं। अपने वोट के रूप में समाज हमें वह दे, उसे पाना हमारा हक है।

इस बार अगर अस्पृश्य समाज जागा नहीं तो पेशवा युग की तरह फिर अस्पृश्यों को कमर में झाडू और गले में थूकने के लिए मटका बांधने की नौबत आएगी। दलित फेडरेशन द्वारा खड़ा किया गया उम्मीदवार केवल एक बहाना है। उम्मीदवार से निजी मतभेद, अदावत आदि को भुला कर दलित फेडरेशन के उम्मीदवार को वोट दें और याद रहे कि उसे वोट देना दलित फेडरेशन को वोट देना है। मान लीजिए कि फेडरेशन के उम्मीदवार के रूप में खुद मैं खड़ा हूं।

विधिमंडल में ब्राह्मण और बनियों के कंधे से कंधा लगा कर 15-20 अछूत सम्मान के साथ उठ-बैठ सकेंगे इस स्थिति तक मैंने आपको पहुंचा दिया है। इस अटूट संगठन को मिट्टी-सीमेंट लगा कर मैं मजबूत करना चाहता हूं। हमें अपने इस किले को अभेद्य रखने की हरसंभव कोशिश करनी होगी। हिंदू और मुसलमान आपस में मिल कर अगर हम पर हमला करें तब भी यह किला अभेद्य रहेगा। उसे चोट न पहुंचे इसकी पूरी-पूरी व्यवस्था मैंने की है।

किसी के निजी दोषों की ओर ध्यान नहीं देना चाहिए। अस्पृश्यों में मतभेद हैं यह कह कर हमारे विरोधी हममें फूट डालने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन यह वास्तविकता नहीं है। मुंबई के पिछले प्राथमिक चुनावों में बहुसंख्य महार मतदाता होने के बावजूद चमार उम्मीदवार को खड़ा कर हमने उसे जिताया। काँग्रेस का टिकट हो तब भी ब्राह्मण मतदाता, ब्राह्मण उम्मीदवार को और मराठा मतदान, मराठा उम्मीदवार को अपना वोट देते हैं, लेकिन हमारे फेडरेशन में ऐसा कोई भेदभाव नहीं।

हम तुम्हें मिनिस्टर बनाएंगे, यह-वो काम करेंगे, फलां फलां देंगे आदि कई तरह के प्रलोभनों को किनारे कर हमारा समाज फेडरेशन के साथ है। यह अब साबित हो चुका है। हमारे उम्मीदवार के खिलाफ कई तरह की अफवाहें फैलाई जाती हैं, लेकिन ध्यान रखें, हमने कड़ी परीक्षा के बाद ही उम्मीदवारों को चुना है। हमारे सभी उम्मीदवार सिद्धांतों का पालन करने वाले हैं।

मुंबई एसेंब्ली में काँग्रेसी मंत्रिमंडल का कामकाज 2 साल 7 महीनों तक चला तब स्वतंत्र मजदूर संघ के 15 निष्ठावान सदस्यों ने किसी से हार नहीं मानी। उन्हें फुसलाने की महती कोशिश की गईं, लेकिन हमारे 15 लोग मतभेद के बावजूद, अनुशासन में, राजनीति में सिद्धांतों के प्रति निष्ठावान रहे।

विद्वान, कार्यकुशल लोग न भी हों तो कोई हर्ज नहीं, लेकिन लोगों में निष्ठा होना जरूरी है। ज्ञान की कमी पूरी करने के लिए मैं हूं। जो बिक सकता है, लालच का शिकार हो