6 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
सकता है उसके होने का कोई फायदा नहीं। अपने पर और भावी पीढ़ी पर आने वाले संकटों को दूर कर भावी पीढ़ी की राह आसान करना अपना कर्तव्य है। हमारे पुरखे पिछले 2000 सालों से चुपचाप गुलामी सहते आए हैं। क्या हम भी उसी गुलामी को चुपचाप सहते रहेंगे? (नहीं......... . जनता की प्रतिक्रिया) हर पीढ़ी का यह कर्तव्य है कि अगली पीढ़ी की राह की कठिनाइयो को हटाने की वे कोशिश करें।
मुसलमानों को जो पाने के लिए 20 सालों तक कोशिशें करनी पड़ी वह हमने 2 सालों में हासिल कर लिया है, यह बेहद महत्वपूर्ण बात है।
मैं आजकल दिल्ली में रह रहा हूं। मेरी टेबिल पर एक घंटी है। उस घंटी को बजाते ही मेरा चपरासी मेरे सामने जिस प्रकार हाजिर होता है, बिल्कुल उसी तरह दिल्ली से मैं जब स्विच दबाता हूं तब मुंबई में तुरंत रोशनी होती है। मेरा आत्मविश्वास झूठा नहीं, बिल्कुल सच्चा है। वास्तविकता की नींव पर खड़ा है। कल का मुंबई का इलेक्शन देखिए। शेड्यूल्ड कास्ट फेडरेशन के भंडारे को 12899 और देवरुवकर को 11334 वोट मिले, जबकि काँग्रेस के उम्मीदवार को धूल चाटनी पड़ी। मुंबई का इलेक्शन भारत के इलेक्शन में हमेशा याद किया जाएगा।
लोगों को लगता है कि मुस्लिम लीग संगठित है। मुस्लिम लीग के ज्यादा उम्मीदवार चुनकर आए हैं। मैं कहना चाहता हूं कि फेडरेशन की ताकत मुस्लिम लीग से भी अधिक संगठित है। उसकी एक वजह भी है। मुस्लिम घेरे के अंदर हैं हम घेरे से बाहर हैं। बाहर रहते हुए भी हम दुश्मन को बुरी तरह मात दे सकते हैं। ऐसी स्थितियों में अस्पृश्यों को राजनीति की समझ नहीं है यह कहना पूरी तरह से मूर्खता है।
आज झगड़ा किस बात पर है? अंग्रेज इस देश से जब चले जाएंगे तब कौन राज करेगा? हिंदू? मुसलमान? या फिर, हिंदू और मुसलमान मिल कर? हमें कई तरह के लालच दिए जाते हैं, लेकिन असली लड़ाई किस बात की है। यह आप लोगों को समझ लेना चाहिए। हमारी लड़ाई सत्ता के लिए है। हम सत्ता चाहते हैं। हम हिंदुओं का राज्य नहीं चाहते। हम भीख नहीं चाहते। हम सचमुच का स्वराज चाहते हैं। हमारी लड़ाई काँग्रेस से है। मुसलमान जो मांगते हैं काँग्रेस उन्हें देती है। मुसलमानों की आबादी 25 प्रतिशत है। उन्हें साढे तैंतीस प्रतिशत सीटें मंजूर हैं। अब वे 50 प्रतिशत की मांग करते हैं। शिमला परिषद के दौरान उनकी यह मांग भी मंजूर करने के लिए काँग्रेस तैयार थी और हमारे वाजिब हक के बारे में काँग्रेस ने क्या कहा? अस्पश्यों को हम सुई की नोक बराबर मिट्टी भी नहीं मिलेगी! (शेम शेम शेम की आवाजें)। पेशवाई को फिर आने नहीं देना चाहते हो तो, आपको जागरुक रहना पड़ेगा। मुंबई एसेंब्ली के लिए मैंने आपके