228 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
अगर सत्ता में आए तो इन सवालों को वह कैसे हल कर पाएगी? अपना निकम्मापन उसने चार सालों के अपने कार्यकाल में साबित कर ही दिया है। काँग्रेस यह कह सकती है कि थोड़े समय में ये समस्याएं हल नहीं हो सकतीं। इसके बावजूद काँग्रेस की केंद्रीय और प्रांतीय सरकारों पर हुकूमत चलाने वाले हाईकमांड द्वारा देश को कम से कम घूसखोरी, सांठगांठ, नैतिक ”ास इन तीन महान रोगों से मुक्त करना चाहिए था। काँग्रेस अगर चाहती तो वह इन बुराइयों को समूल नष्ट कर सकती थी लेकिन इस जहर का असर काँग्रेस सरकार के राजकाज में इतना आ चुका है कि उसे जड़ से उखाड़ना संभव नहीं। छोटे से लेकर बड़े तक हर कोई एक ही थैले के चट्टे-बट्टे बने गए हैं।
काँग्रेसी मंत्रिमंडल से अपना कोई कामकाज करवाना हो तो घूस देनी ही पड़ेगी वरना अर्जी खारिज की जाएगी, यह पक्का जानिए। मैं ये आरोप नहीं कर रहा। काँग्रेस के भीतर से ही ऐसे आरोप किए जाते हैं। घूसखोरी और कालाबाजारी का कुछ हिस्सा काँग्रेस का मंत्रिमंडल लेता है ऐसा खुलेआम लोग बोलते हैं।
मद्रास के मुख्यमंत्री श्री टी. प्रकाशन को काँग्रेस की ऐसे ही अंदरूनी घपलों के कारण इस्तीफा देना पड़ा। इस्तीफा देने के बाद उन्होंने काँग्रेस हाइकमांड के सामने मद्रास के सहयोगी मंत्रियों पर गंभीर आरोप लगाए। उसमें साफ तौर से कहा गया था कि कुछ मंत्रियों ने नियंत्रण का फायदा उठाते हुए खुद की झोली भरी है। साथ ही सरकारी पैसों का निजी काम के लिए इस्तेमाल किया गया। कुछ लोगों ने रिश्तेदारों को सरकारी काम दिए। उत्तर प्रदेश में भी ऐसा ही कुछ हुआ। किसी समय प्रांतीय काँग्रेस के अध्यक्ष त्रिलोकसिंह और अब यू. पी. एसेंब्ली में विरोधी गुट के नेता ने भी काँग्रेस के मंत्रियों पर इसी प्रकार के आरोप लगाए थे। पंजाब में दो पूर्व प्रमुख मंत्री एक-दूसरे पर घूसखोरी का और अनैतिकता का खुलेआम आरोप लगा रहे हैं।
असल में काँग्रेस हाईकमांड को एक जांच आयोग की नियुक्ति कर इन आरोपों की सिलसिलेवार और गहराई से जांच करनी चाहिए। अपराधियों को दंडित करना चाहिए। इस प्रकार जांच किए बगैर यह नहीं कहा जा सकता कि अच्छी सरकार अस्तित्व में है क्योंकि आरोप खुद मंत्रियों पर लगे हैं। एक अंग्रेज मंत्री के साथ घटी एक घटना का यहां जिक्र करना आवश्यक है। एक मंत्री पर घूसखोरी का आरोप था। मजदूर प्रमुख मंत्री मि. एटली ने तुरंत जांच आयोग की नियुक्ति की। पूछताछ में पाया गया कि एक व्यापारी द्वारा मंत्री को क्रिसमस में एक विस्की की बोतल और कुछ कपड़ा दिया गया था। दोनों में लेन-देन का कोई उद्देश्य नहीं था। बात बिल्कुल ही नगण्य थी। लेकिन एटली ने उस मंत्री को इस्तीफा देने पर बाध्य किया।
लेकिन हमारे देश में क्या स्थितियां हैं देखिए। विभिन्न प्रांतों के करीब पच्चीस मंत्रियों पर गंभीर आरोप हैं। लेकिन काँग्रेस हाइकमांड ने इस तरफ से जानबूझ कर आखें मूंद ली हैं। इतना ही नहीं इन लोगों पर लगे आरोपों की जांच नहीं की गई और वे आरोपी चुपचाप मनमानी कर रहे हैं और ऐसे नेताओं के हाथ में अपने देश का भविष्य है।