229
बताइए, ऐसी काँग्रेस और उसके मंत्रियों के बारे में विश्वास कैसे निर्माण होगा? जो
खुलेआम लोगों को लूट रहे हैं ऐसे चोरों के साथ स्वाभिमानी और न्यायप्रिय पुरुष कैसे सहमत हो सकते हैं? मैं तो कहता हूं कि काँग्रेस सरकार भ्रष्ट (corrupt) सरकार है। वह चोरों की सरकार है।
लोगों को लगता था कि जवाहरलाल नेहरू ऐसे आचारभ्रष्ट मंत्रियों के कामकाज पर ध्यान देंगे लेकिन अनुयायियों को उन्होंने घोर निराश किया है। उल्टे, दिल्ली में जब काँग्रेस का अधिवेशन हुआ तब उन्होंने कहा कि अन्य देशों में घूसखोरी बहुत बड़े पैमाने पर होती है। इससे जो पुराने, प्रतिष्ठित चोर हैं उनके लिए खुला दरवाजा मिल जाता है, जो लोग पक्के चोर बनने में आनाकानी करते रहते हैं उन्हें भी ऐसी बातें धीरज देती हैं। जो लोग घूस लेकर अमीर बन रहे हैं वे इस बात से वुश हो सकते हैं कि जवाहरलाल नेहरू हमारे मंत्री हैं। क्योंकि ऐसे अपराधों के लिए सजा नहीं देना, उन्हें माफ करना या उनकी ओर अनदेवी करना पंडितजी अपना धर्म मानते हैं। जिन्हें ऐसी बातें करने में शर्म नहीं महसूस होती वे देश का कल्याण क्या करेंगे?
जो लोग काँग्रेस को वोट देंगे वे इसी बात के लिए देंगे कि ऐसी बातें चलती रहें। लेकिन भारतीयों में अच्छा क्या है और बुरा क्या है पहचानने की योग्यता आ गई है।
काँग्रेस के लोग दूसरों को सलाह देते हैं कि आप अपनी पार्टी छोड़कर हमारी पार्टी में शामिल हो जाइए। क्योंकि, वे कहते हैं कि, काँग्रेस ही देश का भला करने वाली है। मैं आपसे पूछता हूं कि क्या कभी चूहा और बिल्ली एक साथ रह सकते हैं? सांप और नेवले में मित्रता होना क्या संभव है? एक-दूसरे का वे सत्यानाश ही करेंगे। प्राणिमात्रों में ऐसे कई उदाहरण देखने मिलते हैं। इनके बीच भी यही हाल है। देश में कुछ ऐसे लोग हैं और कुछ ऐसे दल हैं जिनका काम परस्परविरोधी है। किसानों को लूटने वाले बनिए और किसानों के बीच क्या कभी मित्रता संभव है? बिल्कुल ऐसा ही हाल ब्राह्मण और अस्पृश्यों के बीच है। ब्राह्मण वर्ग अस्पृश्यों को हमेशा कैद रखना चाहेगा। वह उन्हें कभी उभरने नहीं देगा।
ब्राह्मणवर्ग अस्पृश्यों को सीधा-सादा जीवन तक जीने नहीं देते। फिर अत्याचारी और पीडि़तों का एक दल होना कैसे संभव है? जिस पार्टी में अत्याचारी और स्वार्थी लोगों को प्रतिष्ठा प्राप्त है ऐसी पार्टी से गरीब और अत्याचार पीडि़त लोगों का क्या कल्याण होगा? बिल्कुल नहीं।
इसलिए ऐसे अत्याचारों से पीडि़त लोगों का एक बहुत बड़ा विरोधी संगठन होना बहुत महत्वपूर्ण है। वरना लोगों की उम्मीदों पर ये पानी फेरते ही रहेंगे। काँग्रेस के झांसे में उनके मीठे धोखे में न आना। अपने पैरों पर कुल्हाडी चलाने से आप ही बाद में दुखी होंगे। ऐसे पक्ष में शामिल होना यानी परंपरा से चले आए अत्याचारों के लिए खुद को समर्पित करना है।
इस प्रकार देश को मिली आजादी का उपभोग केवल सवर्ण ही करेंगे। आजादी के