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दुकानें सजा कर बैठ जाते हैं। काँट्रक्ट लेते हैं और देश और लोगों को लूटते हैं।
पिछले चौबीस सालों से मैं अस्पृश्यों को उनके हक दिलाने के लिए लड़ता रहा हूं। लेकिन इसमें मेरा कोई स्वार्थ नहीं है। गांधीजी के सामने मैंने एक सीधा सा सवाल रखा था,
‘‘हम देश की आजादी के खिलाफ नहीं हैं लेकिन आजाद भारत में अस्पृश्यों का क्या स्थान रहेगा?’’ लेकिन इस सवाल का गांधी ही नहीं अन्य कोई भी संतोषजनक जवाब नहीं दे पाए। मैं यही सवाल सवर्ण हिंदुओं से पूछना चाहता हूं।
आज देश की आजादी उनकी है। हम अभी भी गुलाम ही हैं। सवर्ण हिंदुओं के अत्याचार का यह फल है। यह हमारा अपराध नहीं है। हम अगर अन्य लोगों की तरह जीना चाहते हैं तो हमें अपने ही पैरों पर खड़े रहना होगा। अस्पृश्य बहन-भाई इस बात को ध्यान में रखें।
सवर्ण हिंदुओं को मेरा सुझाव है कि वे हमने जो हासिल किए हैं उन राजनीतिक अधिकारों को लागू करने की राह में अड़ंगा न डालें। लेकिन काँग्रेस हममें से नमकहराम लोगों को मौका देती है और भेदभाव करने के लिए कहते हैं। चुनाव का टिकट अपनी झोली में आए इसलिए कोशिश करने वाले लोग स्वार्थी और ढोंगी हैं। पहले वे काँग्रेस के पास जाते हैं वहां से गच्चा मिलने पर, लात खाने पर फिर फेडरेशन से टिकट की भीख मांगने आते हैं। इस प्रकार काँग्रेस, हमने जो हक हासिल किए हैं उन्हें नष्ट करना चाहती है। इसीलिए हमें अभी चौकन्ना होना चाहिए। हमें जमकर सामना करना होगा। चुनावों में हमें अपने ही उम्मीदवारों को जिताना होगा। इसमें अगर हम चूक गए तो हमारी हार निश्चित है यह मान लीजिए।
दस सालों की इस अवधि के बाद वे आपकी ओर देखेंगे भी नहीं। हमें इस तरफ से भी सावधान रहना है और कल की खातिर आज ही अपनी इमारत की नींव मजबूत करनी है। हमें ऐसे ही प्रतिनिधि चुनने चाहिए जो हमारे अधिकारों के लिए संसद में लड़ें और प्राण जाएं तब भी पीछे नहीं हटें।
एक और बात आपको ध्यान में रखनी है कि हम अल्पसंख्यक हैं। हमारे मतदाताओं की संख्या भी कम है। प्रत्येक का मतदान करना महत्वपूर्ण है। मतदान के दिन सभी महिला-पुरुषों अपने बाकी सभी काम एक तरफ रख कर हम में से प्रत्येक को अपने मतदान के अधिकार का इस्तेमाल करना होगा।
इस बार यकीनन लगता है कि काफी सफलता मिलेगी। अब काँग्रेस की मजबूती ढह गई है। पंजाब में दो काँग्रेसी गुट गुत्थम-गुथा हैं। उनमें समझौता होना संभव नहीं। हमें काँग्रेस से डरना नहीं चाहिए। इसीलिए मैं आपसे विनति करता हूं कि देश में फेडरेशन द्वारा खड़े किए गए उम्मीदवार को ही अपना वोट दें। हम अगर इस लड़ाई में जीते तो कई ठोस सुधार ले आएंगे। हमारे अधिकारों के बीच आने वाली बातों को
खत्म कर देंगे।