232 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
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किसने योजना बनाई इसके बजाय देखें कि योजना कैसी है
दिनांक 15 नवंबर, 1951 को भुसावल में डॉ. बाबासाहेब अम्बेडकर ने भाषण में कहा-
भाइयों और बहनों,
पहले जब शराब पर पाबंदी नहीं थी, शराब की सरकारी दुकाने थीं, तब शराब बनाने के गैर-कानूनी काम बहुत ही कम थे। किसी भी दूसरे देश की तुलना में हमारे देश के लोगों में शराब की लत बहुत अधिक है। आज जब शराब पर पाबंदी लगी है तब घर-घर शराब का बनना शुरु हुआ है। घर में ही शराब बनने के कारण महिलाओं और बच्चों को भी शराब की लत लग चुकी है। नैतिकता का अधःपतन बड़ी तेजी से हो रहा है।
शराब की लत छुड़ाने के लिए व्यक्ति का शिक्षित होना जरूरी है। अल्पसंख्यक शराब की लत के मारे लोगों को लत से मुक्ति दिलाने के भरसक कोशिशें की जानी चाहिए लेकिन सरकार ने शिक्षा पाना बहुत कठिन कर रखा है। केवल प्राथमिक शिक्षा से आज पिछड़े समाज का उद्धार संभव नहीं है। उन्हें उच्च शिक्षा मुहैया करानी होगी। जब तक यह नहीं होता तब तक उच्च वर्ग के हाथ में ही सत्ता रहेगी। जब तक इन हालात में कोई बदलाव नहीं आता तब तक स्वराज्य का हम अस्पृश्यों को, पिछड़े वर्ग की जनता को क्या फायदा?
शराब पर पाबंदी लगाने के लिए मुंबई सरकार ने 1946 में 9 करोड़ रुपए बरबाद किए। इतना ही नहीं तो शराब पर पाबंदी लगाने का कानून जारी करने के लिए पुलिस वगैरा की नियुक्ति पर गरीब जनता का 3-4 करोड़ रुपया और खर्च किया जा रहा है। उपस्थित लोगों से मैं एक सवाल पूछना चाहता हूं कि समाज में अत्यंत अल्प संख्या में होने वाले शराबियों को शराब की लत से मुक्त करने, नहीं मुक्त करने का भ्रम पैदा करना महत्वपूर्ण है या समाज के बहुसंख्य भूखे लोगों को जिंदा रखना, जिन्हें बदन ढंकने के लिए कपड़ा नहीं मिलता उन्हें कपड़ा दिलाना, जिनके सिर पर छत नहीं है उन्हें आसरा दिलाना अधिक महत्वपूर्ण है? इस सवाल का आप खुद जवाब दें।
जनताः 1 दिसंबर, 1951