283 15-11-1951 किसने योजना बनाई इसके बजाय देखें कि योजना कैसी है - भुसावल - Page 252

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इस योजना से दो बातें षरूर होंगी। पहली बात यह कि, नियोजन कमिशन के अध्यक्ष जवाहरलाल नेहरू प्रधानमंत्री के नाते एक सर्वाधिकारी बनने वाले हैं। मैं अपना अनुभव आपको बताता हूं। हर विभाग के कामकाज को और विभाग के मंत्री को पंडित नेहरू अपने नियंत्रण में रखना चाहते हैं। वह किसी को आजादी से काम करने नहीं देने वाले। दूसरी बात यह कि इस योजना से घूसखोरी को बढ़ावा मिलने वाला है। जिन्हें सरकारी काम करवाना होता है उन महिला-पुरुष का अनुभव उन्हें यही बताता है कि घूस दिए बगैर सरकारी अधिकारी काम नहीं करते। इस पंचवर्षीय योजना के अनुसार एक लाख से अधिक रकम वाले व्यवसाय को शुरू करने के लिए सरकारी अधिकारी से इजाजत की जरूरत होगी। इससे घूसखोरी के क्षेत्र में हजारों गुना बढ़ोतरी होने वाली है। कुल मिला कर देखा जाए तो इस योजना में उम्मीद जगाने वाली कोई बात नहीं है।

अपने काम के बारे में जब कोई कुछ ठोस बता नहीं सकता तब औरों के बारे में गलफहमियां फैलाने के लिए, औरों की निंदा करने के लिए वह जहां तक संभव हो सारी कोशिश करता है। काकासाहब का आखिर ऐसा ही हुआ। उन्होंने आखिर शेड्यूल्ड कास्ट्स फेडरेशन और समाजवादी के बीच हुए करार को लेकर जहर उगलने की कोशिश की। उनका सवाल है, शेड्यूल्ड कास्ट्स फेडरेशन जातीय संस्था है, और हम कभी भी किसी जातीय संस्था के साथ सहयोग नहीं करेंगे कहने वाले समाजवादियों ने इस जातीय संस्था के साथ सहयोग क्यों किया? काँग्रेस का दावा है कि कुछ दल जातीय हैं और कुछ नहीं। काँग्रेस की ओर से 1920 से प्रचार किया जा रहा है कि दलित फेडरेशन जातीयवादी संस्था है। काँग्रेस का यह भी दावा है कि सिर्फ काँग्रेस ही जातीयवादी नहीं है। काँग्रेस के नेताओं से मेरा सवाल है कि क्या काँग्रेस के नेताओं ने जाति भेदभाव को किनारे किया है? क्या काँग्रेस के नेताओं ने सहभोज, सह-विवाह पर अमल किया है? काकासाहब ने अपनी कन्या के लिए क्या उच्चकुलीन सरदार पुत्र ही नहीं चुना? अधिकार के पदों पर नियुक्ति करते समय अपने ही जाति के लोगों को वरीयता देने की प्रवृत्ति काँग्रेस के नेताओं में बड़े पैमाने पर दिखाई देती है। हमारे अस्पृश्य समाज में हजारों जातियां हैं। लेकिन जातिभेद तोड़ने की हमने जैसी कोशिश की और कर रहे हैं, वैसी कोशिश क्या काँग्रेस के नेताओं ने की है? आज तो वे केवल अपने ही जातभाई की भरती कर रहे हैं। काँग्रेस से विरोध इसलिए है क्योंकि मैं जाति से महार हूं। हमारी कौम का इतिहास लडाकू और स्वाभिमानी जमात रहा है।

नदी का उद्गम और ऋषि का कुल कोई नहीं देखता उसी नजर से हमारे दलित फेडरेशन के कार्यक्रम की ओर, हमारी योजनाओं की ओर देखिए। योजना किसने बनाई यह देखने के बजाय योजना कैसी है यह देखिए। अन्य योजनाओं के साथ कसौटी पर उतारें। ठीक न हो तब बोलिए, बेकार में क्यों बुराई करते हैं?