234 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
काँग्रेस को इस बात का बुरा लगता है कि हमने समाजवादियों के साथ हाथ मिलाया। उन्हें लगता है कि सब काँग्रेस की ही उंगली पकड़ कर चलें। समाजवादियों के साथ हमारे हाथ मिलाने से क्या अनर्थ हुआ हम नहीं जानते। काँग्रेस के अलावा जितने भी दल हैं उन्हें एकजुट करने का मेरा खयाल था। हालांकि चुनाव में अधिक समय बचा न होने के कारण अब यह संभव नहीं है। चुनावों के बाद मैं एक बार फिर कोशिश करने वाला हूं। दो पार्टियों की योजनाएं और कार्यक्रम अगर बहुत अंतर न हो तो चुनाव के लिए हाथ मिलाने में बुराई ही क्या है? इसी भूमिका के आधार पर हमने हाथ मिलाए हैं। पूर्व और पश्चिमाभिमुख दो पक्षों में मेल करना बेईमानी हो सकती है लेकिन एक ही दिशा में अगर दो लोग जा रहे हों तो कुछ फासला वे साथ में तय करें तो उसमें कैसी बेईमानी? उसमें कौनसा पाप? आज तो हमारा मेल केवल चुनावों के लिए है।