285 17-11-1951 सत्ता में आने वाले हर पक्ष को जनता की संपूर्ण हितसाधना के लिए ज्योतिबा फुले की नीति और प्रजातंत्रवादी दर्शन के सहारे ही आगे बढ़ना होगा - नासिक - Page 256

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उद्देश्य से फेडरेशन द्वारा समाजवादी पार्टी के साथ चुनाव-करार किया है। आप जानते हैं कि पंढरपूर जाने के कई रास्ते हैं। सभी एक ही राह से जाएं यह संभव नहीं होता। कुछ लोगों की श्रद्धा होती है कि फलां राह से जाएंगे तभी वैकुंठ की प्राप्ति होगी। अभी तक हमें राजनीति का कोई खास अनुभव नहीं है। जब अनुभव की प्राप्ति होगी तभी सभी दल इकठ्ठा आकर राह के बारे में विचार करेंगे। उसीमें से हमें काँग्रेस के खिलाफ पक्षों की एकजुटता के दर्शन होंगे। लेकिन आज हर किसी को अपना ही रास्ता सही प्रतीत हो रहा है। ऐसे हालात में राह की ओर ज्यादा ध्यान देना छोड़ कर किस दिशा में जाना है यह देख कर उस दिशा में जाने वाले दूसरों के हाथों में हाथ डाल कर आगे बढ़ा जाए तो उसका मतलब किसी को धोखा देना नहीं होगा। और किसी पर बेईमानी का आरोप भी नहीं लगाया जा सकता।

इसी नजरिए के साथ फेडरेशन और समाजवादी पक्ष ने चुनाव गठबंधन किया है। हम दोनों के बीच कुछ मामलों में मतभेद हैं, लेकिन हम दोनों की दिशा एक ही है। उच्च वर्ग के दबाव से जनता को मुक्ति दिलाने को लेकर हम दोनों दलों की एक राय है। इसलिए भले सभी मामलों में हमारी राय एक न हो लेकिन दोनों दलों का एक दिल से, संगठित होकर इस लड़ाई में एक-दूसरे का साथ देना संभव है इसका हम दोनों पार्टियों को यकीन होने के कारण ही हम संयुक्त रूप से चुनाव लड़ने जा रहे हैं।

मुझसे सवाल पूछा गया कि महाराष्ट की शेतकरी-कामगार पार्टी किसान-मजदूर पक्ष से आपने हाथ क्यों नहीं मिलाया? आज से पहले कभी इस विषय पर मैंने सार्वजनिक रूप से कुछ कहा नहीं था लेकिन आज मैं इस सवाल का जवाब देने वाला हूं। पहले ब्राह्मणेतर दल था। न सिर्फ अपने प्रांत में बल्कि मध्यप्रांत, वरदहाद, मद्रास में भी ऐसी पार्टी का अस्तित्व था। म. ज्योतिबा फुले ने इस पार्टी की शुरुआत की थी, इसलिए इस पार्टी के अनुयायी अपने को म. फुले के अनुयायी कहलाने लगे। लेकिन वे केवल नाममात्र के अनुयायी रहे। ज्योतिबा का कार्यक्रम, उनकी नीतियां आदि बातों को इन लोगों ने त्याग दिया। अपने अलग अस्तित्व को जमीन में अपने ही हाथों गाडकर वे काँग्रेस में भी शामिल हुए। कालांतर में ये ब्राह्मणेतर दल नामशेष हुआ। ज्योतिबा का अनुयायी कहलाने में मुझे पहले कभी शर्म महसूस नहीं हुई और आज भी नहीं होती है। आत्मविश्वास के साथ मैं कह सकता हूं कि केवल मैं ही आज तक ज्योतिबा से ईमानदारी और निष्इा के साथ जुडा हुआ हूं। मुझे इस बात का भी यकीन है कि इस देश में जनता के सर्वांगीण हित का उद्देश्य लेकर भले कोई भी दल आए, उस दल का नाम कोई भी हो, उसे ज्योतिबा की नीतियों, उनके दर्शन और उनके कार्यक्रम के सहारे ही आगे बढ़ना होगा। प्रजातंत्र तक पहुंचाने वाला वही एक सही रास्ता है। समाज के 80 प्रतिशत लोगों को विद्या प्राप्ति से वंचित रखना और उन्हें सामाजिक, आर्थिक, राजनीतिक