285 17-11-1951 सत्ता में आने वाले हर पक्ष को जनता की संपूर्ण हितसाधना के लिए ज्योतिबा फुले की नीति और प्रजातंत्रवादी दर्शन के सहारे ही आगे बढ़ना होगा - नासिक - Page 257

238 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

गुलामी में बांध कर रखना खुली आंखों से जब दिखाई देता रहे तब स्वराज, स्वराज कह कर हल्ला मचाने से क्या फायदा? स्वराज का फायदा सबको मिलना चाहिए। पिछड़े वर्ग की सर्वांगीण उन्नति का कार्यक्रम लेकर आगे चलने के अलावा कोई भी दल आज जनता का नेतृत्व नहीं कर सकता यह बात सूरज की रोशनी की तरह सत्य और साफ है। मुझे लगता है कि समाजवादी पार्टी को भी इस बारे में सोचना चाहिए।

आज का किसान-कामगार पक्ष असल में ब्राह्मणेतर दलों की आवृत्ति बन कर आगे आया है। लेकिन ब्राह्मणेतर दल कहलाने में उस पार्टी को शरम क्यों आती है यह मेरी समझ में नहीं आ रहा है। इस पार्टी के नेताओं के साथ हमारे बहुत पुराने और घनिष्ठ संबंध हैं। इसके बावजूद इस दल के साथ फेडरेशन ने सहयोग क्यों नहीं किया इसका जवाब आज मुझे देना है।

इस पार्टी के बारे में एक बात जगजाहिर है कि यह पार्टी किसी जमाने में कम्युनिस्ट पार्टी बनना चाहती थी। नासिक जिले में ही दाभाडी में इस पार्टी की बैठक हुई और उसमें एक योजना को अपनाया गया था। उसे ‘दाभाडी प्रबंध’ कहा जाता है। यह प्रबंध पूरी तरह कम्युनिस्ट दर्शन पर आधारित है। आज इस देश में कम्युनिज्म को जगह देने के लिए मैं तैयार नहीं हूं। हो सकता है जवाहरलाल नेहरू के हाथों आंतरराष्ट्रीय राजनीति में हुईं बड़ी गलतियों के कारण कम्युनिज्म आ भी सकता है और फिर चीन और रूस के नियंत्रण में जाने के बाद इस देश की आजादी खत्म भी हो सकती है।

आज ही यहां के ‘गावकरी’ नाम के अखबार में मैंने एक बड़ा कष्टदायक समाचार पढ़ा। खबर है कि- नेपाल में प्रवेश पाने के लिए कम्युनिस्ट सेना जिस मौके की तलाश में थी वह मौका उसे नेपाल की आंतरिक स्थितियों के कारण मिल रहा है। आज भारत की सरहद पर कम्युनिस्ट सेना बिल्कुल तैयार होकर आकर खड़ी है। कब यह सेना हमारे देश में प्रवेश करेगी इसका कोई भरोसा नहीं है। आज यह डर साफ दिखाई दे रहा है। इतना ही नहीं, मैंने एक साल पहले ही इस संकट की सूचना जवाहरलाल नेहरू को दी थी। उस वक्त किसी ने मेरी बात नहीं सुनी। आज संयोगवश से मेरा डर सच साबित होने जैसे हालात पैदा हो रहे हैं।

हमें अपने देश की आजादी को बनाए रखना होगा। आजादी को कायम रखते हुए हमें देश को समृद्ध बनाना है। कम्युनिज्म को इस देश में अगर हम आसरा देंगे तो हमारी आजादी खत्म हो जाएगी। हमारा देश रूस का गुलाम हो जाएगा। पूर्वी यूरोप के राष्ट्रों का इतिहास हमें यही बता रहा है। आज हमारे देश के सामने जो बड़े महत्वपूर्ण सवाल हैं उन्हें हम अपनी आजादी खोकर हल नहीं कर सकते। कम्युनिज्म के कारण देश की आजादी मिट्टी में मिल जाएगी इस बात को हम नजरंदाज नहीं कर सकते।

कम्युनिज्म के अलावा अन्य रास्ते भी हैं जिन पर चल कर हम अपने देश की