240 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
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एकांगी राजनीति कभी सफल नहीं हो सकती
महा. मुंबई दलित फेडरेशन के महासचिव द्वारा निम्नांकित परिपत्र जारी किया गया था -
‘‘महा. मुंबई दलित फेडरेशन डॉ. बाबासाहेब अम्बेडकर को रु. 25000 का चुनाव फंड अर्पण करेगा!’’
दलित भाइयों और बहनों, मुक्त हस्त से डॉ. बाबासाहेब अम्बेडकर चुनाव फंड में चंदा दें! आज 10 तारीख की अपनी तनख्वाह में से राशि अपनी वार्ड कमेटी में जमा कीजिए! या शेड्यूल्ड कास्ट्स फेडरेशन के परेल के कार्यालय में लाकर दीजिए और शासक जमात में शामिल होइए!!!
आगामी चुनाव अपने जीवन-मृत्यु का प्रश्न है। भारत को आजाद होकर 5 साल हुए लेकिन दलित जनता के जीवन में, उनके रहन-सहन में, उनके दुख में किसी प्रकार का कोई बदलाव नहीं आया है। उल्टे, आजादी के इन दिनों में बहुजन जनता को बेहद परेशान किया गया। स्पृश्य गुंडों ने हर गांव में हुडदंग मचाया। गांवों की अस्पृश्य बस्तियों पर दिन दहाड़े हमले किए गए। घरों में आग लगाई। पीने के पानी में गंदगी डाली गई। सरकार में कोई बहुजनों की फरियाद सुनने वाला नहीं था। इतना ही नहीं, कहीं-कहीं तो हमारे कार्यकर्ता और नेताओं को सरेआम कत्ल किया गया। यह खुनी खेल कांग्रेस द्वारा खेला गया/सवर्ण हिंदू बर्बरता पर उतर आये।
इन सारे अन्याय-अत्याचारों की और दुख की आवाज इस देश के किसी न्यायालय में नहीं गूंजती यह ध्यान में रखें इस विकराल काल की दाढ़ से अपने को मुक्त करना हो तो कल के चुनावों में अपने हाड़-मांस की, रात-दिन आपकी आवाज का जवाब देने के लिए तैयार, आपके कंधे से कंधा लगा कर लड़ने को तैयार, अपने करीबी लोगों को क्या हमें चुनाव में जिताना नहीं चाहिए? उन्हें अगर जिताना है तो उनके लिए जरूरी आर्थिक मदद हमें देनी होगी। इसीलिए चुनाव कोष में उदारता से चंदा दें।
हम सबके पंचप्राण डॉ. बाबासाहेब अम्बेडकर मुंबई से ही लोकसभा का चुनाव लड़ रहे हैं। उन्हें जीतने न देने का प्रण काँग्रेस ने कर लिया है। इसलिए आपको अपना तन-मन-धन स्वार्थ त्याग से अर्पण कर अपने सम्मान को, जो कि यहां हमारे प्रमुख डॉ. बाबासाहेब अम्बेडकर हैं, को बनाये रखना होगा। इस बात को जानकर हममें से हर किसी जनताः 10 और 24 नवंबर, 1951