242 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
की ओर से दी। सम्मानीय माईसाहब के हाथों समता सैनिक दल द्वारा आयोजित खेलों में सफलता पाने वाले सदस्य खिलाडि़यों को कप और मेडल्स दिए गए।
सभास्थल पर प्रिं दोंदे, आयु. चित्रे, आयु. भाऊराव गायकवाड़, कु शांताबाई दाणी, आयु. बोराले, शेड्यूल्ड कास्ट्स फेडरेशन की वार्ड कमेटी के अध्यक्ष और अन्य कार्यकर्ता उपस्थित थे। करीब तीस हजार महिला-पुरुषों की भीड़ से मैदान अरा पड़ा था। मैदान के बाहर भी सैंकड़ों लोग खड़े थे। कई अवबारों के प्रतिनिधि डॉ. बाबासाहेब का प्रेरणादायक भाषण सुनने के लिए आए थे। उन्होंने कहा-
‘‘बहनों और भाइयों,
आज कहना पड़ेगा कि यह सभा एक तरह से एकांगी है। यह सभा केवल अस्पृश्यों की है। सभा एकांगी होने के कारण मैं अपना भाषण भी एकांगी ही करने वाला हूं। आम इलेक्शन मीटिंगों में जहां बड़ा समुदाय होता है वहां एकांगी भाषण देना अनुचित होता है।
पिछले चार सालों से मैं काँग्रेस सरकार में मंत्री की हैसियत से था। आज मैं इस्तीफा देकर काँग्रेस से निकल चुका हूं। ऐसे हालात में जो भी लोग मुझसे मिलते हैं वे मुझसे दो सवाल पूछते हैं . पहला, आपने इससे पहले काँग्रेस क्यों नहीं छोड़ी? आप अगर इससे पहले काँग्रेस से बाहर निकलते तो काँग्रेस के खिलाफ संगठित योजना पर अमल नहीं किया जा सकता था। काँग्रेस के खिलाफ जो भी समूह, उपसमूह हैं उनमें एकजुटता लाई जा सकती थी। दूसरी बात लोगों का कहना यह था कि चार सालों के कार्यकाल में काँग्रेस के साथ मिल कर आप क्यों काम नहीं कर पाए? काँग्रेस के साथ आपके घनिष्ट संबंध क्यों नहीं बन पाए?
इस संदर्भ में मैं स्पष्ट करना चाहता हूं। काँग्रेस के साथ चार सालों के संबंधों में, मैं बहुत करीब से देख और जान पाया कि काँग्रेस को अस्पृश्य अथवा पिछड़ी जाति के लोगों की उन्नति के बारे में क्या सोचते हैं, उनसे उन्हें कितना प्रेम है, कितनी अनिश्चितता है, उदात्त तत्वों के बारे में उनकी क्या निष्ठाएं हैं आदि सब मैं बहुत करीब से देख पाया। जो लोग अस्पृश्यों के उद्धार के बारे में कह रहे थे और आज भी कहते हैं, आगे भी कहते रहेंगे, उनके मन में अस्पृश्यों के बारे में कितना प्रेम है यह देखने का अच्छा मौका मुझे मिला और एक बात अच्छी तरह से समझ में आई कि काँग्रेस के जो सर्वेसर्वा हैं, जो राजनीति में परिवर्तन ला सकते हैं उनके पास शब्दों के अलावा कुछ भी नहीं है। इस मामले में मैं कुछ उदाहरण दे सकता हूं।
देश का संविधान बनाते समय मैंने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, मेरा पूरा सहयोग था। कई लोग कहते हैं कि दफतर में जो बाबू लोग थे उन्होंने संविधान का ढांचा बनाया और