286 22-11-1951 इकतरफा राजनीति कभी सफल नहीं हो सकती - परेल (मुंबई) - Page 266

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में उसीके अनुसार कार्य करेंगे। तय अनुसार कार्य करने में ही हमारी इज्जत है।

मैं पार्लियामेंट के लिए खड़ा हूं। 30 सालों से राजनीति कर रहा हूं। कुर्सी पर बैठ कर सिगरेट पीना राजनीति नहीं, राजनीति इतना आसान काम नहीं है। मैंने बहुत किया लेकिन समाज की स्थिति मुझे चुप बैठने नहीं देती। अपने समाज को चार कदम आगे ले जाने की मेरी इच्छा है।

युवा अब राजनीति में आने के लिए उत्सुक हैं। उन्हें राजनीति का अनुभव होना चाहिए। अपने लोगों में वह हैं या नहीं इस बारे में मुझे पूरा यकीन नहीं है। अब ज्यादा दिनों तक उन्हें इंतजार न करना पड़े। जल्द ही उन्हें मौका मिलेगा।

किसी भी राजनीतिक संस्था के पास एक सहयोगी दल भी होना चाहिए। अस्पृश्यों की जब इसी विभाग में बैठकें हुआ करती थीं तब अन्य लोग उसे न होने देते, पत्थर फेंकते। सभाओं में शोरगुल मचाया जाता। उसके लिए समता सैनिक दल खड़ा किया गया। लेकिन आगे चल कर इस सैनिक दल में खराबी आई। विनयशीलता नहीं रही। मेरे दिल्ली जाने के बाद यह हुआ। आज इस दल का पुनरुत्थान हो रहा है यह अच्छी बात है। उन्हें अब हर चॉल में जाकर काम करना होगा। आज इतने सारे लोग इकठ्ठा हुए हैं। अखबार वाले कितना आंकड़ा बताएंगे पता नहीं! ऐसी सभाओं में केवल संख्या में उपस्थित रह कर अपना काम नहीं बनने वाला है। हरेक को अपने मतदान के अधिकार को भुनाना होगा। मुंबई में काम करने का असली दिन 3 जनवरी है।

अस्पृश्यों की तरह ही अन्य पिछड़े समाज भी हैं। उनके जीवन पर भी फेडरेशन अपनत्व भरी नजर डालेगा ही। मजदूरों की मुश्किलों की तरह ही हमारी भी कुछ मुश्किलें हैं। लेकिन केवल जातिविहीन योजना हम नहीं बना सकते। क्योंकि अस्पृश्यों की कुछ

खास मुश्किलें हैं और उन्हें दलित फेडरेशन ही हल कर सकता है। इसके लिए शेड्यूल्ड कास्ट्स फेडरेशन के हाथ मजबूत करें।