288 25-11-1951 प्रजातंत्र में विपक्षी दल की बहुत जरूरत होती है - दादर (मुंबई) - Page 268

 249

288

प्रजातंत्र में विपक्ष की भूमिका महात्वपूर्ण होती है

रविवार दिनांक 25 नवंबर, 1951 को शाम 4 बजे शिवाजी पार्क मुंबई में शेड्यूल्ड कास्टस् फेडरेशन और समाजवादी पार्टी की ओर से चुनाव प्रचार की विशाल सभा का आयोजन किया गया है। इस सभा में प. पू . डॉ. बाबासाहेब अम्बेडकर और साथी अशोक मेहता के भाषण होंगे। सभा से पहले भायवला से बड़ा जुलूस निकलेगा। जुलूस में आप सब बड़ी संख्या में शामिल हों। - इस आशय का परिपत्र ज. ग. भातनकर, महासचिव, मुंबई शेड्यूल्ड कास्ट्स फेडरेशन शाखा के नाम से जनता के 24 नवंबर 1951 के अंक में प्रकाशित हुआ । सभा में करीब दो लाख लोग शामिल हुए थे।

इस अवसर पर डॉ. बाबासाहेब अम्बेडकर ने कहा-

नेहरू ने परसों हुई सभा में मेरी आलोचना का जवाब देने की कोशिश की। सो उस बारे में अगर मैं बोलूं तो वह अनुपयुक्त नहीं होगा। काँग्रेस की मैं जिस प्रकार की आलोचना करता हूं उसी प्रकार की आलोचना मैंने अपने इस्तीफे में भी लिखी थी। उसके बाद कई दिन बीत गए। नेहरू ने कभी मेरी आलोचना का जवाब देने की कोशिश नहीं की। लोकसभा में भी मेरे निकल जाने के बाद शाम 6 बजे उन्होंने उनके और मेरे बीच हुए पत्राचार को ही पढ़ कर सुनाया। मेरे द्वारा जगह-जगह हुए, दौरे में भी उन्होंने इस संदर्भ में कोई खुलासा नहीं किया और, परसों के भाषण में उन्होंने कहीं कुछ नहीं कहा?

काँग्रेस पर मेरे दो मुख्य आरोप हैं। पहला आरोप यह है कि, काँग्रेस सरकार ने अस्पृश्यों की उन्नति के लिए कुछ काम नहीं किया। नेहरू का कहना है कि मेरा यह आरोप झूठा है। लेकिन यहां सवाल किसी की राय का नहीं है, वास्तविक स्थितियों का है। दुनिया नहीं मानती कि केवल जवाहरलाल नेहरू ही सत्यवचनी हैं और दुनिया में और कोई सत्यवचनी नहीं है। कम से कम मैं ऐसा बिल्कुल नहीं मानता। मेरी बात को नेहरू सिर्फ एक तरीके से स्पष्ट कर सकते थे . अस्पृश्यों लिए उनकी सरकार ने क्या किया है यह बता कर। असल में उन्हें काँग्रेस सरकार द्वारा अस्पृश्यों की उन्नति के लिए किए गए कामों का वास्तविक ब्यौरा देनेवाला परिपत्र जारी करना चाहिए। कम से कम उनके सरकारी दफतर में तो इस बारे में जानकारी उपलब्ध होगी। मुंबई आने से पूर्व और मेरे सवाल का जवाब देने से पहले उन्होंने अपने संबंधित विभागों से लेकर यह जानकारी

जनता, 1 और 8 दिसंबर, 1951