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जाने के बाद भी टंडन द्वारा इस्तीफा देने की जरूरत नहीं होने की बात काँग्रेस कार्यकारिणी ने कही। इसका मतलब यही कि नेहरू के काँग्रेस से चले जाने से भी काँग्रेस को कोई फर्क नहीं पड़ने वाला था। लेकिन बाद में चुनाव सामने आए और अकस्मात् यह तस्वीर पलट गई। किसी मशहूर अभिनेत्री के कारण सिनेमा में और कुछ न होने के बाद भी उसकी मांग बढ़ती है। काँग्रेस वालों को चुनाव जीतने के लिए टंडन कोई खास अभिनेत्री नहीं लगी। इसीलिए मैं नेहरू से एक सवाल पूछना चाहता हूं कि, आज काँग्रेस वाले आपके साथ हैं सो किस कारण से, आपसे उन्हें प्रेम है इसलिए या फिर चुनाव जीतने के लिए आपका इस्तेमाल करना है इसलिए? मैं अगर नेहरू की जगह होता तो मेरे मन में यही सवाल पैदा होता। चार साल मैं काँग्रेस वालों के साथ था। उनके दल के दर कोने में होने वाली बातों की, लोग नेहरू के बारे में क्या बोलते हैं इस बारे में मुझे नेहरू से अधिक जानकारी है।
जो लोग यह कहते हैं कि देश में काँग्रेस ही एक सुसंगठित दल है और कोई दूसरा दल स्थिर सरकार नहीं दे सकता उन लोगों से मैं यह पूछना चाहता हूं कि काँग्रेस में जो अव्यवस्था मची है उसे अगर छोड़ भी दें तो भी क्या काँग्रेस के वरिष्ठ नेताओं की एक राय है? मुझे लगता है चुनावों के बाद ये विवाद और उभर कर सामने आएंगे। मेरा तर्क है कि खुद राजेंद्र प्रसाद और जवाहरलाल नेहरू में भी फिलहाल ठनी हुई है। आपस में गले मिलते हुए उनके जो फोटो छापे हैं वे केवल नागरी संस्कृति की झूठी औपचारिक सभ्यता है। हिंदू कोड को लेकर उनमें जो मतभेद हैं वे भी सामने आ चुके हैं। साथ ही पहले एक बार राष्ट्राध्यक्ष कौन बनेगा तय करते वक्त भी उनके बीच के मतभेद उभर कर सामने आए हैं, तब जवाहरलाल नेहरू ने राजाजी का और पटेल ने राजेंद्रप्रसाद का समर्थन किया था। चुनावों के बाद एक बार फिर इन बातों पर आपसी मतभेदों का उभरना तय है। काँग्रेस के बड़े नेता काँग्रेस के बारे में क्या कहते हैं इसी से काँग्रेस में कितनी गंदगी फैली है यह ध्यान में आता है। खुद टंडन जी ने काँग्रेस का टिकट लेने से साफ मना कर दिया है। बाबू संपूर्णानंद ने भी यही किया है। संपूर्णानंद ने कहा है कि काँग्रेस की राजनीति गटर की राजनीति बन गई है। छल-कपट और धोखेबाजी के सिवा उनके पास कुछ नहीं है।
जवाहरलाल नेहरू की राय का मुझे अभी अंदाजा नहीं लग पाया है। मैं इस सवाल का निश्चित तौर पर जवाब नहीं दे पाऊंगा कि वे कम्युनिस्ट हैं, सोशलिस्ट हैं या फिर पूंजीवादी हैं। हालांकि मैं यह मानता हूं कि वह आमतौर पर प्रगतिवादी हैं। इसीलिए उनके सहयोगी मी. किदवई जब काँग्रेस से निकले थे तब मैंने उनसे कहा था कि अगर आप नेहरू को लेकर पार्टी छोड़ेंगे और सोशलिस्टों जैसी प्रगतिशील पार्टियों के साथ सहयोग करेंगे तो मैं भी आपसे आकर मिलूंगा। लेकिन वे कीचड़ में धंसे हैं इसका कोई क्या