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राजनीतिक अधिकारों के प्रति जागरुकता होने पर ही बड़ी
संस्थाओं से लड़ा जा सकता है
मुंबई के शिवडी लेबर कैम्प महिला मंडल की ओर से दिनांक 19 दिसंबर, 1951 को रात 7 बजे पुराने सिद्धार्थ कॉलेज में डॉ. बाबासाहेब अम्बेडकर के निवासस्थान पर उन्हें 501 रुपयों की थैली सम्मनीय माईसाहब अम्बेडकर के हाथों अर्पण की गई। उस अवसर पर डॉ. बाबासाहेब अम्बेडकर ने उपस्थित महिलाओं को सम्बोधित करते हुए कहा-
बहनों, आज आपकी ओर से दी गई इस राशि के लिए मैं आप सभी के प्रति कृतज्ञ हूं। अभी हम लोगों को पैसों की बहुत जरूरत है। इसीलिए राशि छोटी हो या बड़ी हमारे लिए बहुत ही महत्वपूर्ण है। लेकिन अपनी जिम्मेदारी यहीं खत्म नहीं होती। 3 तारीख को हमें बड़ी जिम्मेदारी निभानी है और वह इस भेंट से कई गुना मूल्यवान है।
यहां इकठ्ठा ज्यादातर महिलाएं मजदूरी करने वालों में से हैं। इसके बावजूद आज की इस घटना से साबित होता है कि समाज की पढ़ी-लिखी महिलाओं से अधिक उन्हें राजनीति में आनंद है। उनकी यह चेतना देखकर मुझे बेहद खुशी हो रही है।
अन्य समाजों की तुलना में अपनी जनसंख्या बहुत कम है। इसके बावजूद काँग्रेस जैसी बलशाली संस्था का हमारे उम्मीदवार सामना कर सकते हैं। इसका कारण हमारा समाज अपने राजनीतिक अधिकारों के प्रति जागरुक हुआ है यही है। अन्य समाज के 25 प्रतिशत लोग मतदान में हिस्सा लेते हैं। सो, हमारे 90 प्रतिशत लोग मतदान करेंगे और इसीलिए हमारे उम्मीदवार के लिए यह संभव होता है कि वह अन्य बढ़े दलों से टक्कर ले।
मुझे उम्मीद है कि जनवरी, की 3 तारीख को आप अपनी जिम्मेदारी पूरी तरह से निभाते हुए अपने उम्मीदवार को जिता देंगे।
जनताः 22 दिसंबर, 1951