258 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
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अल्पसंख्यक समुदायों के मूलभूत अधिकार सुरक्षित रहने चाहिए
21 दिसंबर, 1951 को डॉ. बाबासाहेब अम्बेडकर ने मुंबई के मोहम्मद अली रोड़ पर बेग महमद बाग में मुसलमान भाइयों की प्रचंड सभा में उन्होंने कहा-
साथी हैरिस और कुछ अन्य मुसलमान भाई मेरे पास आए और उन्होंने मुझसे कहा कि आप मुसलमान भाइयों को भी सम्बोधित करें। काँग्रेस की तरफ उनका पलड़ा झुक रहा है। उन्हें लगता है कि काँग्रेस ने हम पर उपकार किए हैं।
मुझे इस बात से थोड़ा आश्चर्य हुआ और गुस्सा भी आया। इसीलिए, मुसलमान भाइयों को चार बातें बताने के लिए यहां आया हूं।
काँग्रेस ने मुसलमानों के लिए क्या किया है? आपको लगेगा कि 1947 के दंगे में काँग्रेस ने आपकी जान बचाई। लेकिन अगर आपको ऐसा लगता है तो आपको गलतफहमी हुई है। काँग्रेसवालों ने आपको आश्रय देने की जगह गुंड़ों को प्रोत्साहित कर दंगे की इस आग में तेल डालने का काम किया है। आपको भयभीत उन्होंने ही किया है। आपको उन्होंने इतना डराया है कि आपको लगने लगा है कि इस देश में काँग्रेस के अलावा आपका कोई तारणहार नहीं रहा है।
इस उदाहरण के आधार पर आपको सोचना चाहिए कि क्या काँग्रेस आपके कृतज्ञताभाव के काबिल भी है? जवाहरलाल नेहरू से कुछ और ही उम्मीदें मानकर आप उनकी महिमा गा रहे हैं। पंडितजी की नीति ढुलमुल है। उनसे उम्मीदें बांध कर आप आखिरकार पछताओगे। जनतंत्र में नेहरू घराने की प्रधान की परंपरा हमें कायम नहीं रखनी है। इतना ही नहीं, बल्कि आप जैसे अंधभक्तों का फायदा उठाकर इस परंपरा को कोई अगर कायम करना चाहता है तो जागरुक समाज यह होने नहीं देगा।
अगले चुनावों में काँग्रेस जीतेगी नहीं। काँग्रेस अब आखिरी सांसे ले रही है अंग्रेज की राजनीति घटिया किस्म की है। हमारे देश की अन्य जनजातियां जैसे अपने राजनीतिक अधिकार पाने के लिए जागरुक हुई हैं उसी प्रकार आपको भी अपनी पुरानी ताकत को बरकरार रखते हुए राजनीतिक अधिकार पाने के लिए लड़ना होगा। संविधान बनाते हुए काँग्रेस ने अल्पसंख्यकों के राजनीतिक भविष्य के बारे में सोच-विचार करने के लिए
जनता, 22 दिसंबर, 1951