294 31-5-1952 सत्ताधारी पक्ष के साथ मतभेद होने के बावजूद देश का कभी अपमान नहीं होने देंगे - मुंबई - Page 283

264 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

डॉ. बाबासाहेब ने तय किया था कि न्यूयॉर्क के किसी निपुण डॉक्टर से अपनी सेहत की जांच करवाएंगे। उस वक्त कोई भी अपने साथ न हो यह उनकी इच्छा थी। इलस्ट्रेटेड वीकली ऑफ इंडिया के मि. संवाददाता पोलेक्स से डॉ. बाबासाहेब ने कहा था, कि अपने खर्चे के लिए जितने डॉलर्स की जरूरत है उतनी रकम बँक से न मिलने के कारण अपनी पत्नी को वे न्यूयॉर्क नहीं ले जा सकते हैं।’’ ख्1,

डॉ. बाबासाहेब अम्बेडकर अमेरिका जाएंगे

‘‘कोलंबिया विश्वविद्यालय न केवल अमेरिका का बल्कि विश्व का सुप्रसिद्ध विश्वविद्यालय है। इस विश्वविद्यालय से ही डॉ. बाबासाहेब अम्बेडकर ने एम. ए .और पीएच. डी. की उपाधियां प्राप्त की थीं। पीएच डी का प्रबंध उपाधि योग्य होने की बात परीक्षकों द्वारा माने जाने के बाद उसे पहले प्रकाशित करना पड़ता है। प्रबंध प्रकाशित होने के बाद ही उपाधि अपने नाम के साथ लगाने की विश्वविद्यालय द्वारा इजाजत दिए जाने का नियम था लेकिन डॉक्टरसाहब की विद्वत्ता और प्रबंध लिखने के लिए उन्होंने जो परिश्रम किया था, उसे ध्यान में रखते हुए उन्हें खासतौर से प्रबंध प्रकाशित होने से पूर्व उपाधि अपने नाम के साथ लगाने की इजाजत दी गई थी।

दुनिया की अधिकता से बिकनेवाली रीडर्स डाइजेस्ट जैसी पत्रिकाओं और अखबारों द्वारा डॉ. बाबासाहेब अम्बेडकर का अमेरिकी जनता को परिचय प्राप्त तो था ही, साथ ही दुनिया के एक महान विद्वान तथा, ग्रंथकार और प्रभावी वक्ता के तौर पर भी वे वहां मशहूर हैं। भारत के संविधान निर्माता के तौर पर पहले ही उनके नाम का डंका वहां बज रहा था। विश्व को जिन दार्शनिकों ने अपने बुद्धिप्रमाण्य ज्ञान, कर्तत्व और फिलोसोफी से प्रभावित किया उन गिने-चुने विश्वविख्यात दार्शनिकों में बाबासाहेब का नाम शीर्ष पर आना है।

अमेरिका में जगह-जगह उनके भाषण भी होंगे और अमेरिकी जनता पर उनके व्यक्तित्व की छवि उभरेगी।

डॉ. अम्बेडकर को कोलंबिया यूनिवर्सिटी की ओर से भारतीय संविधान निर्माण के लिए एल. एल. डी. की उपाधि से सम्मानित किया। उपाधि स्वीकारने के लिए शनिवार सुबह की उड़ान से कोलंबिया जाना था, इसलिए डॉ. बाबासाहेब अम्बेडकर मुंबई आए हुए थे। उस वक्त शे. का. फे. के अध्यक्ष और महासचिव उपस्थित थे। साथ ही मुंबई राज्य फेडरेशन के प्रांताध्यक्ष दादासाहब गायकवाड़ और सिद्धार्थ कॉलेज के रजिस्ट्रार श्री कमलाकांत चित्रे आदि लोग उपस्थित थे।

माईसाहब के साथ बाबासाहेब जब हवाई जहाज से उतरे तब प्रांताध्यक्ष ने फूलमालाएं पहनाकर उनका स्वागत किया। तुरंत वह अपने प्रिय राजगृह में चले गए।’’ ख्2,

  1. डॉ. बाबासाहेब अम्बेडकर चरित्रः चां. भ. खैरमोडे, खंड 10वां, पृ. 280, 281 और 283
  2. जनताः 24 मई, 1952