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इसीलिए आप रुपया जोड़ने के काम में लग जाएं।
कुछ लोग सार्वजनिक कामों के लिए पैसा देते हैं। लेकिन जो बिचौलिए होते हैं वे बीच में ही पैसा हड़प जाते हैं। इसलिए कुछ लोग इस शक के कारण पैसा ही नहीं देते कि हम जिस काम के लिए पैसे देंगे उससे पता नहीं काम होगा भी कि नहीं।
ऐसी बात अगर हो तो आप वह पैसा लाकर मुझे दे दीजिए। मैं उन्हें स्वीकारने के लिए तैयार हूं। अब तक मैंने कभी पैसा नहीं लिया। लेकिन अब इस काम के लिए पैसा लेने के लिए मैंने अपने आपको तैयार किया है। इसलिए जो लोग मेरे ही पास पैसा लाकर देना चाहते हों वे हर रोज शाम 7 से 8 बजे के बीच मेरे दादर के ‘राजगृह’ बंगले पर लाकर दें। वहां श्री उपशाम मास्तर आपको रसीद देंगे। वे इस फंड के ट्रस्टी हैं और हिसाब का काम भी वे ही देखते हैं। मैं अगले महीने-डेढ़ महीने तक ही मुंबई में हूं। सितंबर माह के पहले हफते में, मैं मुंबई छोड़ कर दिल्ली जाने वाला हूं। इसलिए मेरे निकलने से पहले ही लोग मेरे पास पैसे लाकर दें।
आप अगर मुझे 60 हजार रुपए देंगे तो हमारे पास लगभग एक लाख रुपए इकठ्ठा होंगे। इसके बावजूद हॉल बनाने के लिए हमें पौने लाख यानी पिचहत्तर हजार रुपयों का कर्जा लेना होगा, और मैं वह लूंगा। सवा-दो, ढाई लाख रुपए का हॉल गिरवी रख कर इतनी रकम का कर्जा कोई भी देगा। हालांकि बाद में ये पिचहत्तर हजार रुपए भी आपको ही चुकाने हैं। मुंबई में हॉल की कितनी मांग है आप जानते हैं। हर माह बड़ी आसानी से हमें हॉल के जरिए एक हजार रुपए मिल सकते हैं। हर साल अगर 15-20 हजार रुपए लौटाए जाएं तो कुछेक सालों में ही हॉल हमारे नाम हो सकता है। एक और बात मैं आपसे कहना चाहता हूं। ‘जनता’ अखबार के लिए एक ट्रस्ट होना चाहिए, ऐसा मुझे लगता है। ’जनता’ में अगर कोई नुकसान उठाना पड़ा तो उसकी भरपाई इस ट्रस्ट से की जा सकती है। अखबार की हम लोगों को बेहद जरूरत है। हम पर होने वाले जुल्म और अत्याचार और शिकायतें जनता तक पहुंचाने के लिए हमें ‘‘जनता’’ अखबार चलाना ही पड़ेगा। इस काम के लिए मैंने अलग से पैसा इक्ट्ठा किया है। वे 32 हजार रुपए (बत्तीस हजार रुपए) मैं फिलहाल हॉल के काम के लिए बिना ब्याज का वह मेरा पैसा कर्ज के रूप में देने के लिए तैयार हूं। लेकिन आगे ये पैसे आपको मुझे लौटाने होंगे। तीन स्त्रोतों से मेरे पास रुपए इकठ्ठा हैं। 1. इमारत फंड के 2. ‘जनता’ के, 3. फेडरेशन के पैसे। विभिन्न प्रांतों से वे मुझे मिले हैं। उन्हें केवल राजनीति पर ही खर्च करना है। इसीलिए इस काम के लिए मैं वे नहीं दे पाऊंगा।
पहले वाला इमारत फंड हमने मुंबई सरकार के ट्रस्ट कानून के अनुसार शेड्यूल्ड कास्टस् इंप्रूवमेंट ट्रस्ट, मुंबई के नाम से रजिस्टर किया है। इसलिए इन पैसों में कोई हेर-फेर होगा डरने की आवश्यकता नहीं है। हर साल सरकार की ओर से इस खाते