272 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
की जांच की जाने वाली है।
मुंबई में सभी लोगों के अपने हॉल हैं। मुंबई में घरेलु कामकाज करने वाले तिरले कुणबी (कुर्मी) समाज के लोगों ने भी परेल में ‘वाघे हॉल’ नाम से अपनी मालिकाना हक वाला हॉल बनाया है। वह लोग हमारी संख्या की तुलना में कम हैं। इसके बावजूद उन्होंने अपना खुद के मिलकियत का हॉल बनाया। इस बात से ईर्ष्या पालते हुए आप लोगों को तुरंत काम में जुट जाना चाहिए। मैं एक बार फिर बता दूं कि रसीद-बुक्स वापिस न आने के कारण हिसाब पूरे नहीं किए जा सके हैं। इसलिए, जो हिसाब पूरे नहीं हुए हैं उन सभी हिसाबों के रसीद-बुक्स और इकठ्ठा की गई रकम आप लोगों को लाकर देनी होगी। जो लोग ऐसा नहीं करेंगे उन्हें बख्शा नहीं जाएगा।