274 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
बो²डग में लाया जाए? उन्हें शिक्षा कौन देगा? और इतना करने के बाद वे समाज की ओर देखते भी नहीं, क्या यह अहसानफरामोशी नहीं है? मैं अपनी जिंदगी आपके भले के लिए समर्पित कर रहा हूं लेकिन मुझे चिंता हो रही है कि मेरे बाद इस समाज का क्या होगा? मेरी इस चिंता को दूर करने वाले लोग आपके समाज में अब तक पैदा क्यों नहीं हो रहे हैं? सोचता हूं तो लगता है कि मैंने व्यर्थ ही अपना जीवन आप लोगों के लिए व्यतीत किया।
जल्द ही मुंबई में, मैं आपके लिए बड़ा हॉल बनानेवाला हूं। इसीलिए, उस दिन दामोदर हॉल में मैंने स्पष्ट किया कि मैंने कितने पैसे इकठ्ठा किए और आप लोगों ने कितने दिए। आप लोगों का कितना पैसा मेरे नाम पर बँक खाते में जमा है यह मैंने साफ-साफ आप लोगों को बता दिया है। इसके पीछे उद्देश्य बस इतना ही है कि मेरे पीछे मेरा बच्चा भी इस संपत्ति पर अपना अधिकार न जता पाए और आप लोगों को भी हर बात का साफ-साफ पता हो। इसके बावजूद आप सब लोग मिल कर इस हॉल को बनाने के लिए जी-तोड़ मेहनत करें। नगर जिला, नासिक जिला, फिर संगमनेर तहसील। आगे अपने गांव के बारे में, मैं खुद सोचूंगा इस तरह की सोच अब खत्म करनी होगी।