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दूसरी बात यह है कि ये सारी शिकायतें दर्ज करने वालों के लिए अपने समाज की एक केंद्रीय कचहरी होना जरूरी है। उस कचहरी में काम करने वालों को तनख्वाह देनी होगी। लेकिन ये बातें कैसे संभव हो सकती हैं? अगर यह हॉल बन गया तो साल में लाख रुपए किराए के रूप में हमें मिलेंगे। यह जगह बिल्कुल शहर के बीचोंबीच है। इसलिए हॉल बनाने के बाद यह बड़ी कठिनाई दूर होगी।
केवल मेरे नाम की जयकार करने से बेहतर है जो बात मेरी नजर में अमूल्य है उसे करने के लिए आप जी-जान से कोशिश करें। हॉल बनाने के काम को मैं बहुत महत्व देता हूं। उससे अस्पृश्य समाज पर गांवों में होने वाले अत्याचारों का हम तुरंत खात्मा कर सकेंगे। इसलिए तीन महीनों के अंदर-अंदर आप गांवों से एक लाख रुपया इकठ्ठा कर भेजिए। हर गांव से दस-दस रुपए जमा करें। मुंबई में शेड्यूल्ड कास्टस् इंप्रूवमेंट ट्रस्ट के सचिव श्री शांताराम अनाजी उपशाम के पास रुपये भेजें। दशहरे को मैं उस हॉल बनाने के काम की शुरुआत करना चाहता हूं क्योंकि इस दिन भारत का महान सपूत चक्रवर्ति बौद्ध सम्राट अशोका ने बुद्ध धम्म अपनाया था। हॉल के काम के लिए जमा रकम में एक लाख रुपए कम हैं। इसलिए हर गांव से दस-दस रुपए के हिसाब से हर तहसील से एक-एक हजार रुपए इकठ्ठा कर भेजने के काम में आज ही से लग जाइए।