298 28-9-1952 सार्वजनिक धन के गलत इस्तेमाल जैसा नीच कृत्य कोई और नहीं - मुंबई - Page 297

278 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

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सार्वजनिक धन के गलत इस्तेमाल जैसा कोई और नीच कृत्य नहीं

  1. शे. का .फेडरेशन, 2. शे. का. इंप्रुवमेंट ट्रस्ट, 3. म्यु मजदूर संघ, 4. महार जाति पंचायत, 5. समता सैनिक दल इन पांच संस्थाओं की ओर से रविवार दिनांक 28 सितंबर, 1952 को शाम साढ़े पांच बजे नरे पार्क में मुंबई की अस्पृश्य जनता का सार्वजनिक सम्मेलन आयोजित किया गया था। इस सम्मेलन का मुख्य कार्यक्रम डॉ. बाबासाहेब अम्बेडकर का भाषण था। साढ़े पांच बजने से पहले ही अस्पृश्य महिलाएं और पुरुषों से पार्क पूरी तरह भर गया था। ठीक साढ़े पांच बजे डॉ. बाबासाहेब अम्बेडकर माईसाहब अम्बेडकर के साथ सम्मेलन की जगह पधारे। उपस्थित जनता ने उत्साह के साथ तालियां बजा कर मन से उनका स्वागत किया। मंच पर तथा मंच के पास प्रतिष्ठित व्यक्ति विराजमान थे। बॅ. कांबले, आयु. बी. सी. कांबले . एम. एल. ए, आयु. बोराले . अध्यक्ष, म्यु मजदूर संघ, आयु. भंडारे . एम. ए. एल. एल. बी, आयु. जे. जी. भातनकर, आयु. शां. अ. उपशाम- सचिव शे. का. इंप्रुवमेंट ट्रस्ट, आयु. आर. जी. वरात। अध्यक्ष शे. का. फेडरेशन आदि लोगों का जिक्र किया जा सकता है।

पहले आयु. उपशाम ने सम्मेलन का उद्देश्य बताया। उन्होंने कहा, आज कई दिनों के बाद डॉ. बाबासाहेब अम्बेडकर जनता के बीच आए हैं। इससे पूर्व ही वे सबसे मिलना चाहते थे लेकिन बारिश के कारण उन्हें रुकना पड़ा। आज पांच संस्थाओं की ओर से यह सार्वजनिक सम्मेलन किया जा रहा है। लेकिन ये पांच संस्थाएं वैसे अलग-अलग नहीं हैं। एक ही पेड़ की पांच शाखाओं की तरह ये संस्थाएं हैं। इन शाखाओं का तना एक ही है। उसीसे उन्हें जीने का बल मिलता है। अस्पृश्य आंदोलन के विविध उद्देश्यों के लिए अगर ये संस्थाएं निकली हैं, लेकिन उन सबका आधार डॉ. बाबासाहेब अम्बेडकर ही हैं। सो, आज के कार्यक्रम में बोलने की मैं आप सबकी तरफ से उनसे विनती करता हूं।

तालियों की गड़गड़ाहट के बीच डॉ. बाबासाहेब अम्बेडकर भाषण देने के लिए उठे। उन्होंने कहा-

बहनों और भाइयों,

आजकल कई लोगों का मन राजनीति में रमा हुआ है। मेरा मन लेकिन राजनीति में नहीं रमता। मेरा पूरा ध्यान हम लोगों द्वारा शुरू किए गए इमारत फंड में लगा हुआ है।

जनताः 4 अक्तूबर, 1952