282 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
छात्रों का ध्यान न होना श²मदा होने वाली बात है। इसी प्रकार आज के विश्वविद्यालय जेम्स और चार्लस् का दर्शन छात्रों के माथे जबरदस्ती जड़ रहे हैं। छात्रों को चाहिए के वे ऐसी बातें खुद पहचानें और आग्रह करें कि हमें सही शिक्षा चाहिए।
मानवी जीवन में वैचारिक और नैतिक मूल्य कभी भी स्थिर नहीं रहे हैं। समय के साथ-साथ उनमें बदलाव आते रहे हैं। न वे सिर्फ बदलते हैं बल्कि वे दिनों-दिन बेहतर होते जाते हैं। भारतीय छात्रों को भी चाहिए कि वे इन नित बदलते जीवनमूल्यों पर ध्यान दें और उन्हें अपने आचरण में लाने के लिए प्रतिबद्ध हों। उन्हें ध्यान देना होगा कि इन नए दर्शनों को विश्वविद्यालय पाठ्यक्रम में शामिल कर रहे हैं अथवा नहीं।
लेकिन खेद की बात यह है कि आधुनिक छात्रों का बौद्धिक और वैचारिक स्तर गिरता जा रहा है। भूतकालीन मानवीय प्रज्ञा से उनकी तुलना ही नहीं हो सकती। बौद्धिक स्तर में इस प्रकार गिरावट क्यों आ रही है इस बात पर छात्रों को सोचना चाहिए। उनकी इस अधोगति का कारण स्पष्ट है कि वे भूतकालीन ज्ञानियों और प्रतिभावानों की कृतियों का ध्यान से अध्ययन नहीं करते।
दूसरी तरफ, आजकल के छात्र फुटबॉल, क्रिकेट और खोखली राजनीति में डूबा रहता है। विद्यार्जन का बहुत बड़ा अर्थ है। हमारे प्राचीन गुरुकुल एकांत में विद्या पढ़ाया करते थे। वनों में उनके विश्वविद्यालय की स्थापना होती थी, जिसका प्रमुख कारण यह था कि छात्रों को पढ़ाई की नई दृष्टि प्राप्त हो। शिक्षा का मतलब है दुनिया को समझना और कुरितियों पर प्राप्त ज्ञान से कड़ा प्रहार करना। इस नए नजरिए से वे सही जीवनमूल्यों की खोज करें उनसे सीखें। लेकिन आजकल के छात्र खेल और राजनीति में खो जाते हैं और उस दिव्य दृष्टि को प्राप्त ही नहीं करते।
हिंदी विद्यालयों के अध्यापक बेमन से, अरुचि केवल जिम्मेदारी ली हुई है इसलिए विद्यादान करता है। उनके द्वारा स्वयंप्रेरणा से विद्यादान नहीं होता। अध्यापक के लिए जरूरी अंतःस्फूर्ति, विद्यादान का शौक और उसके लिए जरुरी निरंतर समर्पित अध्ययनभाव की उनमें कमी होती है। अध्यापन को एक पेशे का स्वरूप प्राप्त हुआ है, घंटा भरने के लिए उन्हें जो पढ़ना सिखाना पड़ता है उसके कारण ही शायद अध्यापक वर्ग में यह शिथिलता व्याप्त हुई है। इसी कारण अध्यापक अपने दल को विचार करने के लिए प्रेरण् ा देने वाला ज्ञान देने में असमर्थ साबित हुए हैं।
विद्यालयों द्वारा अपनी फीस में अंटशंट बढ़ोतरी की है। फीस में इसी प्रकार वृद्धि होती रहे तो छात्रों के जीवन पर उसका बुरा परिणाम होगा। उनका भविष्य खतरे में पड़ जाएगा केबन ने कहा है, Knowledge is Power, ज्ञान महान शक्ति है। शिक्षा का मतलब यह नहीं है कि केवल ज्ञान प्राप्त कर नौकरी पा ले। छात्रों को इस ज्ञान की आराधना कर अपने देश का विकास और उद्धार करना हो तो उन्हें अपने विश्वविद्यालय के कामकाज