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में जरूर ध्यान देना होगा और अपने हकों के लिए हमेशा लड़ते रहना होगा।
विश्वविद्यालयों का कामकाज चलाने वाले सिनेट में बैठे क्रियाशून्य बूढ़ों को हटाए बगैर विश्वविद्यालय के कामकाज में सुधार नहीं आने वाला। उल्टे इन्हीं लोगों के कारण विश्वविद्यालयों में खुले आम घूस आदि चल रही है। सिनेट के सदस्य का शिक्षा संबंधी साहित्य या वैज्ञानिक उपकरण खरीदने की शर्त पर ही किसी नए स्कूल को या कॉलेज को मान्यता प्राप्त होती है। इसीलिए, छात्र खुद ही विश्वविद्यालयों का कामकाज संभाले और अपना हित सिद्ध करें।