300 22-12-1952 प्रजातंत्र में सफल कामकाज के कुछ पूर्व सुनिश्चित शर्तें - पुणे - Page 303

284 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

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प्रजातंत्र में सफल कामकाज की कुछ पूर्व सुनिश्चित शर्तें

‘‘जून 1952 से डॉ. बाबासाहेब अम्बेडकर की सेहत में सुधार आने लगा। उन्हें थोड़ा आराम महसूस होने लगा। पिछले 10-15 सालों में भगवान बुद्ध का चरित्र और कार्य के बारे में उन्होंने गहराई से अध्ययन किया था। जुलाई माह से इस विषय पर वे नोटस निकालने लगे। बीच-बीच में कभी-कभार वे अन्य ग्रंथ पढ़ कर अपने लेखन के लिए कुछ नोटस् भी बना रहे थे। विभिन्न संस्थाओं से उन्हें भाषण के आमंत्रण मिलते थे लेकिन स्वास्थ्य ठीक न होने के कारण उन्होंने कोई आमंत्रण नहीं स्वीकारा था। पिछले साल भर से पुणे के लोग उनका भाषण रखने की कोशिश में जुटे हुए थे। लेकिन बाबासाहेब ने उनके आमंत्रण के लिए भी हामी नहीं भरी थी। अक्तूबर में बाबासाहेब एक बार फिर मुंबई आए तब पुणे के दो वकील उनसे मिलने आए। उन्होंने विनम्रता से एक बार फिर बाबासाहेब से आग्रह किया कि पुणे में किसी अच्छे विषय पर बाबासाहेब भाषण करें। इस बार बाबासाहेब ने उनकी विनती का सम्मान करते हुए उनकी बात मान ली। बाद में पत्राचार से विषय तय किया गया। ‘असली प्रजातंत्र किसे कहा जाए और उसे बनाए रखने के लिए क्या करना चाहिए?’ आदि मुद्दों पर बाबासाहेब ने अपने विचार प्रकट करना तय किया। बाबासाहेब के ये विचार पूरे भारत की जनता को पता चलें ऐसी व्यवस्था हम करने वाले हैं ऐसा उनसे मिलने आए वकीलों ने कहा था। उसके बारे में विस्तार से जानने की इच्छा बाबासाहेब ने व्यक्त की तब उन्होंने बताया कि बाबासाहेब का भाषण वे प्रकाशित करेंगे। बाबासाहेब को उनकी यह बात पसंद आई। भाषण की तारीख 22 दिसंबर, 1952 तय की गई। बाबासाहेब ने अपना भाषण दिसंबर के पहले सप्ताह में तैयार किया। उसे आयुष्मान नानकचंद रत्तु ने टाइप किया।’’ ख्1,

दिनांक 22 दिसंबर, 1952 की शाम को पुणे डिस्ट्रिक्ट लॉ लाइब्रेरी के हॉल में कार्यक्रम का आयोजन किया गया।

पहले डिस्ट्रिक्ट लॉ लाइब्रेरी की ओर से पुणे के विख्यात वकील स्व. ल. र. बनाम तात्यासाहब गोखले के तैलचित्र का डॉ बाबासाहेब के हाथों अनावरण हुआ। उसी प्रकार आयु. ए. बी. सेठना और हरि विठ्ठल तुलपुले द्वारा लाइब्रेरी को दिए गए पुस्तक-संग्रह का उद्घाटन डॉ. बाबासाहेब अम्बेडकर के हाथों हुआ। इस समारोह में न्यायाधीश, मैजिस्ट्रेट, वकील और बाहर के कई अन्य लोग उपस्थित थे। दर्शकों से हॉल खचाखच

  1. डॉ. भी. रा. अम्बेडकर चरित्रः चां. भ. खैरमोड़े, खंड 11 पृ. 20-21