286 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
परमाधिकार पर अमल करने से राजा को रोकना यही तब प्रजातंत्र का उद्देश्य था। तब राजा की यह तक कहने की हिम्मत हुई थी कि- ‘कानून बनाने वाली एक संस्था के रूप में भले संसद का अस्तित्व होगा, लेकिन एक राजा होने के नाते मुझे कानून बनाने का परमाधिकार प्राप्त है और मेरा कानून ही सर्वश्रेष्ठ कानून है।’ राजा की इस स्वयंसत्ता पद्धति के कारण ही प्रजातंत्र अस्तित्व में आ सका।
अब प्रजातंत्र के उद्देश्य क्या हैं? राजा की स्वयंसत्ता पद्धति पर अधिक से अधिक अंकुश लगाए रखना लोकतंत्र का उद्देश्य न होकर आम जनता का, सामान्यजनों का कल्याण करना ही उसका मुख्य उद्देश्य है। प्रजातंत्र के उद्देश्यों में जो प्रमुख बदलाव आया है वह यही है और इसीलिए मैंने अपने विषय को जो नाम दिया है उसमें आपके ध्यान में आएगा कि ‘प्रजातंत्र में सफल कामकाज की कुछ पूर्व सुनिश्चित शर्तें’ शब्दों का चुनाव मैंने बड़े ध्यानपूर्वक किया है। हमारी समझ के अनुसार प्रजातंत्र के मायने क्या हैं? विषय की शुरुआत से पहले ही हमारे मन में इस विषय के बारे में साफ जानकारी होना षरूरी है। आपको इस बात का अहसास है कि राजनीतिशास्त्र के लेखकों ने, विचारकों ने और समाजविज्ञानियों जैसे कई लोगों ने प्रजातंत्र की परिभाषाएं दी हैं। अपने मुद्दे के स्पष्टीकरण के लिए मैं केवल दो ही परिभाषाओं का स्पष्टीकरण यहां करने वाला हूं। ब्रिटिश संविधान पर वॉल्टर बेगहॉट द्वारा लिखित चर्चित ग्रंथ से आप में से कितने लोग वाकिफ हैं मैं नहीं जानता। लेकिन वह ग्रंथ प्रजातंत्र का सहीं ढांचा बताने की पहली आधुनिक कोशिश है। वॉल्टर बेगहॉट द्वारा लिखित इस ग्रंथ के बारे में अगर आप जानते हों तो आपको पता होगा कि उसमें ‘विचार-विमर्श से चलने वाला शासन’ इस प्रकार प्रजातंत्र की व्याख्या की गई है। उसने प्रजातंत्र की परिभाषा इसी विचार के आधार से की है।
दूसरा उदाहरण मैं अब्राहम लिंकन का दे रहा हूं। दक्षिण के राज्यों पर विजय पाने के बाद गेट्टीसबर्ग में किए अपने प्रसिद्ध भाषण में उसने प्रजातंत्र की व्याख्या की है कि, ‘लोगों का, लोगों द्वारा और लोगों के लिए चलाया गया शासन है प्रजातंत्र।’ ठीक है! प्रजातंत्र के मायने समझाने के लिए अन्य कई परिभाषाएं दी जा सकती हैं। मैं खुद व्यक्तिगत प्रजातंत्र की व्याख्या थोड़े अलग ढंग से करता हूं। मुझे लगता है कि वह काफी हद तक सही भी है। मेरी प्रजातंत्र की परिभाषा इस प्रकार है . ‘लोगों के आर्थिक और सामाजिक जीवन में बिना खून-खराबे के क्रांतिकारी बदलाव लाने वाली शासनव्यवस्था को प्रजातंत्र कहते हैं।’ यह मेरी प्रजातंत्र की व्याख्या है। लोगों के सामाजिक, आर्थिक जीवन में मौलिक बदलाव लाने के लिए प्रजातंत्र अगर उसे चलाने वाले लोगों के काम आ रहा हो और उसके द्वारा लाए जाने वाले बदलाव अगर लोग बिना किसी खून-खराबे के स्वीकारने के लिए तैयार हों तो मैं मानता हूं कि वहां प्रजातंत्र है। प्रजातंत्र की यह सच्ची कसौटी है। हो सकता है यह काफी कठिन कसौटी हो, लेकिन आप जब किसी बात का मूल्यांकन करते हैं तब उसे कठिन से कठिन कसौटी पर कस कर आजमाते हैं।