300 22-12-1952 प्रजातंत्र में सफल कामकाज के कुछ पूर्व सुनिश्चित शर्तें - पुणे - Page 308

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की संकल्पना कितनी महत्वपूर्ण है। सत्ताधारियों द्वारा उनके पक्ष को न मानने वाले लोगों के लिए किए गए का समर्थन करने को ही विपक्ष कहते हैं।

दुर्भाग्य से अपने देश के सभी अखबार किसी एक कारण के लिए या अन्य कुछ कारणों के लिए मेरी राय के अनुसार विज्ञापनों द्वारा कमाई करने के साधन हैं। ऐसे अखबारों ने शासन को विपक्षी दलों से अधिक प्रसिद्धी दी है। क्योंकि विरोधी पार्टियों से उनकी कमाई नहीं होती पैसा नहीं मिलता। शासन से उन्हें कमाई होती है। इसलिए सहज ही सत्ताधारी पार्टी के सदस्यों द्वारा किए, भाषणों से दैनिक अखबारों के कॉलम भरे जाते हैं और विरोधी पार्टी के सदस्यों के भाषण की खबरें अखबार में कहीं आखिरी पन्ने पर आविरी कॉलम में दी जाती हैं। मैं प्रजातंत्र की आलोचना नहीं कर रहा हूं। प्रजातंत्र के लिए जरूरी पूर्व सुनिश्चित शर्त के बारे में मैं आपको बता रहा हूं। विरोधी पक्ष प्रजातंत्र की पूर्व सुनिश्चित जरूरत है। शायद आप जानते हों कि इंग्लैंड में विरोधी पक्ष न केवल मान्यताप्राप्त है बल्कि विरोधी पक्ष के नेताओं को विरोधी पक्ष चलाने के लिए सरकार से तनख्वाह दी जाती है। उनके साथ उनका सचिव होता है, टाइपिस्ट और शॉर्टहैंड वाले कर्मचारी दिए गए है। बैठने और काम करने के लिए उन्हें हाऊस ऑफ कॉमन्स में एक कमरा दिया जाता है। इसी प्रकार कनाडा में विरोधी पार्टी (विपक्ष) के नेता को वहां के प्रधानमंत्री की तरह तनख्वाह मिलती है। क्योंकि इन दोनों देशों में प्रजातंत्र के बारे में धारणा है कि अगर सरकार गलत राह पर जा रही हो तो उसे यह बताने के लिए किसी न किसी की आवश्यकता जरूर होती है और यह काम तुरंत और निरंतरता से करना पड़ता है। इसीलिए विरोधी पार्टी (विपक्ष) के नेता पर निधी खर्च करने में उन्हें आपत्ति नहीं होती।

मेरी राय में प्रजातंत्र की सफलता के लिए पूर्व सुनिश्चित एक और शर्त होती है और वह है कानून और प्रशासन के संदर्भ में सबके प्रति समानता। कानून के संदर्भ में सबके साथ समानता न बरती जाने के कई उदाहरण मिलते हैं। इस वक्त इस बारे में विस्तार से किसी को कुछ बताने की जरूरत नहीं है। लेकिन प्रशासन में समानता का मामला बहुत ही महत्वपूर्ण है। सत्ताधारी पार्टी द्वारा अपनी पार्टी के सदस्यों के फायदे के लिए प्रशासन से काम करवाने के कई मामलों के बारे में आपमें से कई लोगों को जानकारी हो सकती है। वुद मुझे इस तरह के कई उदाहरण याद हैं। मान लीजिए कि लाइसेंस के बिना न किया जा सके ऐसा कोई व्यवसाय है। इस प्रकार के कानून के बारे में विवाद नहीं हो सकता। वह सब पर लागू है। उस कानून में भेदभाव नहीं हो सकता।

निर्णय लेते समय मंत्री महोदय पहले व्यक्ति को लाइसेंस देते हैं और दूसरे को देने से मना करते हैं। लाइसेंस प्राप्त करने के लिए दोनों व्यक्तियों की योग्यता समान होने के बावजूद मंत्री महोदय ऐसा करते हैं। इससे शासन का भेदभावपूर्ण व्यवहार दिखाई देता है क्योंकि यहां समान न्याय नहीं है। लाइसेंस का सवाल यानी यह अथवा वह विशेषाधिकार