12 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
236
राजनीतिक सत्ता में मुख्य पद हासिल करो
भारतीय अस्पृश्य वर्ग के नेता डॉ. बाबासाहेब अम्बेडकर ने दिनांक 16 फरवरी, 1946 के दिन बेलगांव जिले के कुछ प्रमुख गांवों का सरसरी तौर पर दौरा किया। शेडबाल में उन्होंने लोगों को चुनाव के बारे में थोड़ा उपदेश दिया। उसके बाद वह ऐगली गांव गए। वहां उपस्थित जनसमुदाय को उन्होंने अहसास कराया कि अस्पृश्य समाज के हिस्से आई जिम्मेदारी कितनी महत्वपूर्ण है। उसके बाद वह सोली और अथणी गांवों का दौरा कर शाम 5.30 बजे के आसपास निपाणी पहुंचे। वहां जोर-शोर से उनका स्वागत किया गया।
निपाणी हाईस्कूल के बड़े मैदान में डॉ. अम्बेडकर के भाषण का आयोजन किया गया था। वहां सभा शुरू होने से पहले ही काफी भीड़ जुटी थी। सभा के सुरक्षा इंतजाम की जिम्मेदारी समता सैनिक दल की थी और वे मुस्तैदी से उसमें जुटे हुए थे। करीब 1000 समता सैनिक हाथों में लाठियां और भाले लिए अपनी जगहों पर तैनात थे। उन्हें देख कर प्रतिस्पर्धियों को डर महसूस होना स्वाभाविक था। स्वयंसेवकों के बंदोबस्त के कारण सभा का कामकाज बिना किसी रुकावट के संपन्न हुआ। स्वयंसेवकों द्वारा निभाई गई इस सामाजिक जिम्मेदारी के लिए निश्चित रूप से कोई भी उन्हें धन्यवाद ही देगा।
सभास्थान पर डॉ. बाबासाहेब का आगमन होते ही उनके नाम की जय बोली गई और तालियों की गड़गड़ाहट हुई। फिर क्षणकाल में सब ओर शांति छाई। स्वागत गीत और औपचारिक भाषण के बाद डॉ. अम्बेडकर का भाषण हुआ। उन्होंने अपने भाषण में कहा,
प्रिय भाइयों और बहनों,
मुंबई विधिमंडल चुनावों को लेकर अस्पृश्यों के क्या कर्तव्य हैं यह बताने के लिए, मैं आज यहां आया हूं। इस विधिमंडल में प्रतिस्पर्धियों को टक्कर देकर हमने 15 जगहें पाई थीं। उन सभी जगहों पर हमें अपने ही उम्मीदवारों को फिर से जिताना होगा। अगर ऐसा नहीं हुआ तो फिर हम पर यकीनन पछताने की नौबत आएगी, इस बात को पक्का मान लेना। काँग्रेस ही हमारी दुश्मन है। वह अस्पृश्यों के लिए कुछ नहीं करेगी। दो साल सात महीनों तक सत्ता उसके हाथ में थी लेकिन हमारे लिए काँग्रेस ने कोई बड़ा
गरुड़ः 3 मार्च, 1946