300 22-12-1952 प्रजातंत्र में सफल कामकाज के कुछ पूर्व सुनिश्चित शर्तें - पुणे - Page 312

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अगर सत्ता में हों तब भी अल्पमत वालों को अपने बारे में सुरक्षितता महसूस होनी चाहिए। अल्पमत वालों पर दबाव डाला जाता है या उनके खिलाफ दांव-पेंच लड़ाए जाते हैं ऐसा उन्हें नहीं लगना चाहिए। हाऊस ऑफ कॉमन्स में इस बात का बहुत ज्यादा ख्याल रखा जाता है। 1931 में जब रैम्से मैकडोनल्ड ने लेबर पार्टी से इस्तीफा दिया और राष्ट्रीय सरकार की स्थापना की उस समय के इंग्लैंड के आम चुनावों के परिणाम शायद आप में से कई लोगों को याद हों। चुनाव जब होने थे, तब लेबर पार्टी के सदस्यों की संख्या 150 के आसपास थी। लेकिन चुनावों के बाद लेबर पार्टी को केवल 50 जगहें मिलीं और प्रधानमंत्री बाल्डविन की पार्टी को 650 जगहें मिलीं। उस समय मैं इंग्लैंड में था। ऐसी तूफानी सफलता पाने वाली कंजर्वेटिव पार्टी के साथ काम करने वाली 50 सदस्यों की लेबर पार्टी में से किसीके द्वारा यह शिकायत की गई हो ऐसी कोई घटना मेरे सुनने में नहीं आई कि उनके भाषण की आजादी का विरोध हो रहा है, या किसी भी प्रकार का प्रस्ताव रखने के अधिकार से उन्हें वंचित किया जा रहा है। आपको भी शायद इस बात की जानकारी हो। अपनी संसद का उदाहरण लीजिए। हमारे विरोधी पार्टी द्वारा लगातार जो निंदा करने वाले प्रस्ताव और स्थगन प्रस्ताव रखे जाते हैं उसका मैं कभी समर्थन नहीं करता। संसद में हमेशा स्थगन प्रस्ताव लाते रहना यह कोई अच्छी बात नहीं है। असल में आपके देखने में यह बात आई ही होगी कि इंग्लैंड जैसे देश में संसद में निंदा या स्थगन प्रस्ताव चर्चा के लिए कम ही स्वीकारे जाते हैं। मुझे सचमुच इस बात पर बहुत आश्चर्य हुआ। इंग्लैंड की संसद के चर्चा-वृत्तांतों में सभापति द्वारा स्थगन प्रस्ताव को अस्वीकृत किए जाने की बात मेरे पढ़ने में बहुत कम आई है। अर्थात्, वह शासन का आदेश होना चाहिए। मैं जब मुंबई विधानसभा का सदस्य था उस वक्त श्री मोरारजी, आयु. मुन्शी, आयु. वेर और हमारे कुछ अन्य मित्रवर सत्ता में थे। उन्होंने उस वक्त चर्चा के लिए एक भी स्थगन प्रस्ताव को स्वीकृति नहीं दी थी। उस वक्त हमारे मित्र आयुष्मान मावलणकर सभापति थे। उन्होंने एक तो, ऐसे स्थगन प्रस्तावों को नियमों के खिलाफ ठहराते हुए सत्तापक्ष की मदद की या जैसा कि खुद उन्होंने माना है, मंत्री महोदय के विरोध होने की बात कही। ऐसे प्रस्तावों को मंत्री महोदय द्वारा अगर विरोध किया जाए तो क्या होता है यह आप भलीभांति जानते हैं। मंत्री महोदय जब किसी स्थगन प्रस्ताव का विरोध करते हैं तब जो सदस्य स्थगन प्रस्ताव लाते हैं उन्हें स्थगन प्रस्ताव को 30 या 40 सदस्यों का- या जो भी संख्या तय हुई हो उतने सदस्यों का समर्थन है यह दिखाना पड़ता है। जिन अल्पमत वाली पार्टियों का कुल प्रतिनिधित्व 4, 5 या 6 हो उन दलों द्वारा प्रस्तुत किए स्थगन प्रस्ताव को अगर सत्ताधारी पार्टी द्वारा बार-बार या हमेशा विरोध किया जाए तो अल्पमत वाली पार्टियों को अपनी शिकायतें रखने का मौका ही नहीं मिलेगा। परिणामस्वरूप अल्पमत वाली पार्टियों में कानून के खिलाफ जाने की, विद्रोह की भावना पैदा होती है। इसलिए, यह आवश्यक है कि जनतंत्र के अनुसार जब काम चलता रहता है और जिन बहुमत के लोगों पर वह