300 22-12-1952 प्रजातंत्र में सफल कामकाज के कुछ पूर्व सुनिश्चित शर्तें - पुणे - Page 314

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खड़े रहने की कर्तव्यनिष्ठा। अन्याय किसके साथ हो रहा है यह बात तब महत्वपूर्ण नहीं रह जाती। इसका मतलब है कि हर किसी को, भले वह अन्याय से पीडि़त हो या न हो, अन्याय से पीडि़त व्यक्तियों की मदद करने की तैयारी करनी होगी। वर्तमान युग के उदाहरण के तौर पर हम दक्षिण अफ्रीका को ले सकते हैं। वहां अन्याय के बोझ तले पिचकी जनता भारतीय है। सच है ना? वहां के गोरों पर अन्याय नहीं होते। लेकिन इसके बावजूद रेवरंड स्कॉट नामक एक गोरा उनका दुख दूर करने के लिए जी-जान से जुटा हुआ है। हाल ही में पढ़ने में आया कि वहां के गोरे वंश के युवा दक्षिण अफ्रिका के भारतीय लोगों के मुक्ति आंदोलन में सहभागी हो रहे हैं। इसी को प्रजानिष्ठा कहते हैं। मैं आपको धक्का लगे इसलिए यह सब नहीं कह रहा हूं। कई बार लेकिन मुझे लगता है कि हम सचमुच बहुत ही भुलक्कड़ हैं। हम दक्षिण अफ्रीका के अन्याय के बारे में बोल रहे हैं मैं कई बार खुद ही आश्चर्यचकित हो जाता हूं कि विलीनीकरण तथा अन्य बातों के खिलाफ बोलने वाले हम जैसे लोगों के पास हर गांव में क्या दक्षिण अफ्रीका नहीं है? हमारे हर गांव में दक्षिण अफ्रीका है और ऐसा होने के बावजूद कोई सवर्ण जाति वाला - इक्का-दुक्का ही सही वर्गीकृत जातियों की समस्या लेकर लड़ता हुआ दिखाई नहीं देता है। यहां ऐसा क्यों होता है? क्योंकि यहां लोकनिष्ठा नहीं। ‘‘मैं और मेरा बहुमत वालों का देश केवल इसी विश्व में हम खोए रहते हैं।’’ इस प्रकार की कोई बात अगर होती है तो अन्याय के नीचे पिसने वाले अल्पसंख्यकों को अन्याय निवारण के लिए दूसरों से मदद नहीं मिलेगी। इसी बात से प्रजातंत्र के लिए खतरा पैदा करने वाले विद्रोह की मानसिकता बढ़ती जाएगी।

आखिर, सज्जनों और महिलाओं, मुझे यहां बुलाने के पीछे आपकी क्या प्रेरणा थी अथवा क्या उद्देश्य था यह मैं नहीं जानता। मैं अभी आपके सामने जिस विषय पर बोला हूं वह विषय इस देश के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है इस बारे में मुझे कोई शक नहीं है। हमारी सर्वसाधारण धारणा यह है कि हमें आजादी मिली है। अंग्रेज चले गए हैं। प्रजातंत्र का पोषण करने वाला संविधान मिला है और अधिक क्या चाहिए? इससे अधिक कुछ किए बिना अपना काम पूरा हुआ है यह सोच कर हमें अब आराम करना चाहिए। संविधान तैयार हुआ है, इसलिए हमारा काम पूरा हो चुका है ऐसी भावना के खिलाफ मुझे आपको चेताना पड़ रहा है। कर्तव्य अभी खत्म नहीं हुआ है। अब तो सिर्फ शुरुआत हुई है हमें और भी बहुत कुछ जिम्मेदारियां निभानी हैं। आपको यह याद रखना होगा कि प्रजातंत्र का पौधा हर जगह जड़ें नहीं पकड़ता। अमेरिका में वह पनपा, इंग्लैंड में पनपा। फ्रांस में कुछ हद तक पनपा। अन्य जगहों पर असल में क्या हुआ जानने के लिए इस उदाहरण से आपको कुछ हद तक धैर्य प्राप्त होगा। इसी प्रकार आपमें से कुछ लोगों को यह याद होगा कि पहले महायुद्ध के परिणामस्वरूप और ऑस्ट्रिया और हंगरी साम्राज्य के विभाजन के स्वरूप विल्सन ने स्वनिर्णय के आधार से ऑस्ट्रिया से अलग छोटे-छोटे