300 22-12-1952 प्रजातंत्र में सफल कामकाज के कुछ पूर्व सुनिश्चित शर्तें - पुणे - Page 315

296 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

राष्ट्रों को बनाया उनकी शुरुआत भी प्रजातांत्रिक संविधान से और प्रजातांत्रिक शासन से हुई और उनके संविधान में मौलिक अधिकारों का भी समावेश था। ये मौलिक अधिकार उन पर वरसाइल्स के शांति की सुलह से उनके लिए बंधनकारी बनाए गए थे। मेरे मित्रों, क्या आप जानते हैं कि उस प्रजातंत्र का क्या हुआ? क्या प्रजातंत्र का छोटा-सा अंश भी वहां देखने मिलता है? वे सब वत्म हो गए हैं। समाप्त हो गए हैं। कुछ और विद्यमान उदाहरण लीजिए सीरिया में प्रजातांत्रिक शासन था। कुछेक सालों में ही वहां सेना ने क्रांति की। सीरिया का प्रमुख कमांडर वहां का राजा बना और प्रजातंत्र खत्म हुआ। एक और उदाहरण लीजिए, मिश्र का क्या हुआ मिश्र में? 1922 से लेकर अगले 30 सालों तक वहां प्रजातांत्रिक शासन व्यवस्था थी। लेकिन फारुक को रातों-रात सत्ता छोड़ देनी पड़ी और नजीब इजिप्त का तानाशाह बना। उसने तुरंत वहां का संविधान जला दिया।

ये सभी उदाहरण हमारी आंखों के सामने हैं। इसीलिए मुझे ऐसा लगता है कि अपने भविष्य के बारे में हमें बहुत ही सावधान और बहुत ही समझदार बनना होगा। अपना प्रजातंत्र सुरक्षित रखने के लिए और अपनी राह के पत्थर और शिलाएं दूर हटाने के लिए क्या हम कुछ कार्यक्रम हाथ में ले रहे हैं या नहीं इस बारे में हमें गंभीरतापूर्वक सोचना होगा। आपके सामने रखे मेरे कुछ विचारों से आपमें अगर जागरूकता आई हो और अगर आपको लगने लगे कि समस्याओं को लेकर हमें लापरवाह रहना नहीं चाहिए तो मुझे लगेगा कि मैंने अपना कर्तव्य पूरा किया है।’’ ख्3,

भाषण के बाद कुछ लोगों ने प्रश्न पूछे। बाबासाहेब अम्बेडकर ने उनके जवाब दिए। ख्4,

  1. यशस्वी संसदीय लोकशाहीच्या प्राथमिक शर्तीः अनुवादक सचिन तासगावकर
  2. जनता, 27 दिसंबर, 1952