301 25-12-1952 हक पाने के लिए महिलाएं अपने मन की दुर्बलता को त्याग कर, कमर कस कर आगे आएं - कोल्हापूर - Page 316

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हक पाने के लिए महिलाएं मन की दुर्बलता को त्याग कर,

कमर कस कर आगे आएं

कोल्हापूर में दिनांक 25 दिसंबर, 1952 को महिलाओं की विभिन्न नौ संस्थाओं की तरफ से डॉ. बाबासाहेब अम्बेडकर को राजाराम फिल्म थिएटर में आयोजित एक बडे समारोह में प्रशस्ति अर्पण किया गया। महिलाओं की प्रार्थना के अनुसार उन्होंने अपने हिंदू कोड बिल में महिलाओं को क्या-क्या हक दिए गए हैं और उनके लिए क्या-क्या प्रबंध किए गए हैं इस बारे में संक्षेप में लेकिन बड़े सरल ढंग से विवेचन किया। समारोह में अनगिनत महिलाएं और कुछ पुरुष भी उपस्थित थे।

कार्यक्रम की शुरुआत मधुर स्वर में गाए महाराष्ट्र गीत से हुई। उसके बाद विमलाताई बागल ने अपने परिचयात्मक भाषण में हिंदू कोड बिल मंजूर नहीं किए जाने के बारे में

खेद व्यक्त करते हुए कहा कि इस बिल के पास होने तक हम महिलाओं को बाबसाहब का साथ देना होगा।

उसके बाद प्रशिÐ पढ़ कर सुनाने के बाद उन्होंने उसे डॉ. बाबासाहेब अम्बेडकर को समर्पण किया। इस अवसर पर ‘‘करवीर भगिनी मंडल’’, ‘‘शुक्रवार पेठ भगिनी मंडल’’, ‘‘महिला सेवा मंडल’’, ‘‘वनिता समाज’’, ‘‘नामदेव महिला मंडल’’, ‘‘शारदा भगिनी मंडल’’, ‘‘स्त्री मंडल’’, ‘‘शिवाजी पेठ भगिनी मंडल’’, ‘मराठा महिला’ मंडल संस्थाओं की ओर से डॉ. अम्बेडकर को पुष्पमालाएं अर्पित की गईं। मेजर दादासाहब निंबालकर ने भी डॉ. बाबासाहेब और डॉ. माईसाहब अम्बेडकर को फूलमालाएं पहनाईं।

उसके बाद डॉ. बाबासाहेब अम्बेडकर ने कहा-

आज के युग में संपत्ति ही आजादी का आधार है। जब तक महिलाओं को संपत्ति में वारिस नहीं माना जाता तब तक उनकी गुलामी खत्म नहीं होने वाली। हिंदू कोड बिल में मैंने उस प्रकार का इंतजाम भी किया था। हालांकि, वह बिल मंजूर नहीं हुआ। अब इसके बाद कौन-सा बिल आता है, उसका स्वरूप क्या है, उसमें महिलाओं के हकों की, आजादी की क्या व्यवस्था रखी गई है इस ओर महिलाओं को बहुत ध्यान देना होगा। इतना ही नहीं अपने अधिकारों की लड़ाई लड़ने के लिए उन्हें अपने मन की दुर्बलता को त्यागना होगा और कमर कस कर खड़े रहना होगा तभी उनकी स्थिति में सुधार हो सकता है। कुछ प्रगति हासिल की जा सकती है। दही बनाने के लिए दूध में जामन डाल

जनता, 3 जनवरी, 1953