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अधिकारों के लिए लड़ा। लेकिन महिलाओं ने क्यों थोड़ी भी उत्सुकता नहीं दिखाई यह बात मेरी समझ में नहीं आती। इस बिल को समर्थन देने की बात तो दूर, कुछ महिलाओं ने मुझसे मिल कर यह बताने की कोशिश की कि यह बिल अच्छा नहीं है। मैं दिल्ली में था तब महिलाओं का एक प्रमुख प्रतिनिधिमंडल मुझसे मिलने आया। उनसे जब मैंने पूछा कि क्या आपने वह बिल पढ़ा है? तो उन्होंने बताया कि नहीं पढ़ा। उनमें से जो प्रमुख महिला थीं उन्हें बुला कर मैंने पूछा कि जब आपने बिल पढ़ा ही नहीं है तो विरोध क्यों कर रही हैं, तो उन्होंने बताया ‘मेरे पति ने मुझसे कहा कि उस बिल का विरोध करो वरना मैं दूसरी शादी करूंगा। इसलिए, सौत को सहने से मेरे लिए यही बेहतर है कि मैं इस बिल का विरोध करूं। लेकिन यह महिलाओं की मानसिक दुर्बलता है। इसी दुर्बलता के कारण वह बिल मंजूर नहीं हो पाया। महिलाओं में ताकत होती तो वह बिल नामंजूर नहीं रह पाता।
चुनाव जीत कर पार्लियामेंट में आई महिलाओं ने भी इस बिल को लेकर जागरुकता नहीं दिखाई। उन सभी महिला सदस्यों का पूरा ध्यान यूनो, आइएलओ, कोरिया आदि मामलों पर ही लगा रहा। मेरे बिल का समर्थन करने के लिए वे तैयार नहीं थीं। बिल का समर्थन करने पर यूनो या अन्य कहीं जाने का मौका नहीं मिलेगा इसका उन्हें डर था। इस प्रकार की लोभी मानसिकता के कारण ही हमारे देश का नुकसान हो रहा है। सार्वजनिक अथवा राजनीतिक क्षेत्र में काम करने वाला हर व्यक्ति आज इसी ताक में रहता है कि मैं कमिश्नर कब बनूंगा या मुझे फलां पोस्ट कब मिलेगी। इसी लोभ से उसके सभी काम चलते रहते हैं। महिलाओं में मुझे यह दोष बहुत दिखाई देता है। महिलाओं के मन पर परंपरा की पकड़ अधिक कसी हुई होती है। इसीलिए उनमें यह दुर्बलता दिखाई देती है। उन्हें ऐसा डर मन से निकाल देना चाहिए।
इंग्लैंड की महिलाओं ने मतदान का हक पाने के लिए आंदोलन किए हैं। उसी प्रकार महिलाएं अगर अपनी स्थितियों में सुधार चाहती हों, आजादी पाने में यह बिल मंजूर होना चाहिए ऐसा अगर उन्हें लगता हो तो उन्हें आंदोलन करना होगा। उसके बगैर महिलाओं पर अत्याचार करने वाले पुरुष उनकी स्थितियों में सुधार नहीं लाएंगे। इंग्लैंड में महिलाएं अपनी इच्छा से तलाक लेकर अपना जीवन बिता सकती हैं। इसके पीछे उन्हें मिला विरासत का अधिकार है। उसी प्रकार मलबारी समाज में पिछले 50-60 सालों से तलाक ज्यादातर नहीं होते क्योंकि वहां भी महिलाओं को विरासत का अधिकार मिला हुआ है। इसीलिए पुरुष उसके साथ अच्छा व्यवहार करता है। इसीलिए पुरुषों की तरह ही अपने को भी विरासत का अधिकार मिले इसके लिए महिलाओं को आंदोलन करना होगा। घर में बैठ कर अथवा सभा-सम्मेलनों में प्रस्ताव पारित कर ये काम नहीं होने वाला है। उसके लिए आंदोलन करने के लिए महिलाएं खुद आगे आएं।