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राजनीति से लोगों में आभा और जागृति पैदा होनी चाहिए
दिनांक 25 दिसंबर, 1952 के दिन डॉ. बाबासाहेब अम्बेडकर कोल्हापूर की नगरपालिका में आए। इस अवसर पर आयोजित सभा में शुरुआत में नगराध्यक्ष श्री भाऊसाहब पाटील ने भाषण में बाबासाहेब के कार्य की प्रशंसा की और नगरपालिका के काम के बारे में जानकारी भी दी।
इस अवसर पर बाबासाहेब ने कहा-
अब डरे हुए लोगों की राजनीति नहीं चलेगी। जो सही है ऐसा लगता है उसे खुल कर कहना होगा। उसमें लुकाछिपी या बहानेबाजी नहीं चलेगी। लोगों में तेज और जागृति पैदा करने वाली राजनीति होनी चाहिए। कोल्हापुर की जनता में आग है लेकिन बार-बार उसे उत्प्रेरित करना होगा, हवा देनी होगी। वरना, जिस हालत में अभी वह है उसी हालत में छोड़ दें तो उस पर राख जमेगी और वह बुझ जाएगी। साथ ही, जो रास्ता आपको सही लगता है उस पर निडरता से आगे बढि़ए। सरकार के कानून का अथवा जेल का डर मन में मत पालिए। जेल में डाल भी दिया तो उसमें बुरा मानने की कोई जरुरत नहीं है। जो कानून मैंने बनाया है उसके तहत वो मुझे भी बंद कर सकते हैं। लेकिन उससे डरने जैसी कोई बात नहीं है। क्योंकि राजनीति क्रिकेट के खेल की तरह है। उसमें जो एक बार हारता है वह दोबारा जीतेगा नहीं यह कैसे कहा जा सकता है? लेकिन हारे हुए को निराश होकर खेल छोड़ नहीं देना चाहिए।
आज उच्च वर्णीय लोगों के हाथों में सत्ता आई है वह अपना चातुवर्ण्य का श्रेष्ठधर्म ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य को भारत के राजनीति में स्थापित करने पूरी-पूरी ताकत लाएंगे। अति पिछड़े, अस्पृश्य, आदिवासी तथा महिलाओं को इस राजनीतिक प्रक्रिया से दूर रखने का षड्यंत्र बनाकर उन्हें फिर से अपना गुलाम बनाने की कोशिश करेंगे। वे इस भ्रम में हैं कि अंग्रेज तो गए, अब राज हमारे ही हाथ में है। शान से वे जिस कुर्सी पर बैठना चाहते हैं उस कुर्सी के पाये कभी निम्न वर्गीय समाज काट ही देगा। उच्चवर्गीय नहीं चाहते कि निम्न वर्गीय प्रशासन सत्ता में आए लेकिन वह आएगा जरूर। उसके लिए रशिया और फ्रांस देशों की तरह क्रांति भी होगी।
उक्त कार्यक्रम से पूर्व कोल्हापूर जिला शे. का. फेडरेशन की ओर से नगरपालिका के सभागृह बाबासाहेब को गण-मान्य इस अवसर पर शहर के कई जलपान के लिए आमंत्रित किया गया। लोग उपस्थित थे।
जनताः 3 जनवरी, 1953