304 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
मैं अगर काँग्रेस में होता तो नेहरू प्रधानमंत्री बनता क्या? कभी नहीं।
हमारी फेडरेशन में कई बजरबट्टू इकठ्ठा हुए हैं। उनसे मेरा कहना है कि जो फेडरेशन छोड़ना चाहते हैं वे अभी छोड़ कर चले जाएं। उनके लिए फेडरेशन में जगह नहीं है। दो पत्थरों पर वे मैं पैर न जमाएं। फेडरेशन का पेड़ जल्दी फल नहीं देगा। उसमें फल देर से आएंगे लेकिन वह चिरकाल तक टिकी रहेगी। जो पेड़ जल्दी आता है और जिसमें जल्दी फल लगते हैं वह पेड़ जल्दी मर भी जाता है। इस प्रकार का पेड़ हमारे काम का नहीं। इसलिए जिन्हें जल्दी फल चाहिए वे उस तरफ जाएं।
हमारे लोगों ने अब तक अपार कष्ट सहे। उनके लिए मैं कुछ करना चाहता हूं। उन्हें मैं ऐसे ही छोड़ देने वाला नहीं हूं। हमारे कार्यकर्ताओं को कुर्सी की राजनीति नहीं
खेलनी राजनीति वह एक ऐसी मास्टर की है, जिससे आप हर समस्या का ताला खोलकर उसका हल निकाल सकते हैं। यह ऐशोआराम और काला पैसा कमाने का साधन नहीं है। राजनीति करने वाले व्यक्ति में ईमानदारी और नीतिमत्ता का सदगुण होना बहुत ही जरूरी है। आगे चल कर लोहे के चने चबाने पड़गे। जिन्हें वे नहीं पचने वाले वे अभी से छोड़ कर चले जाएं। फेडरेशन में कम लोग हों तो भी मुझे चलेगा। आंदोलन छेड़ा तब मैं, कुर्सी और टेबल इतना ही था। उससे मैं हताश नहीं हुआ था। इस चुनाव में भले हम हारें हमें निराश नहीं होना चाहिए, अपना आंदोलन जारी रखना होगा। समय आने पर मैं आपको आवाज दूंगा और आप मेरे साथ हामी भरना।