306 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
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बुद्ध दर्शन अपनाकर दुनिया युद्ध से दूर और शांति के करीब होगी
नई दिल्ली में रविवार दिनांक 15 फरवरी, 1953 के दिन इंडो-जापानी सांस्कृतिक संगठन के सचिव आयु. मूर्ती और उनकी पत्नी का आयु. राजभोज ने समारोह आयोजित कर डॉ. बाबासाहेब अम्बेडकर का सम्मान किया। इस समारोह में डॉ. बाबासाहेब अम्बेडकर, आयुष्मति माईसाहब अम्बेडकर, रोहिणीकुमार चौधरी, ज. भोसले, विधायक कृष्णा और अन्य पंद्रह-बीस विधायक उपस्थित थे। इस अवसर पर आयुष्मान बापूसाहब राजभोज ने अपनी जापान यात्रा के कुछ संस्मरण बताए। वहां बौद्ध धर्म के विकास का जो दर्शन हुए थे उसका वर्णन किया। आयुष्मान मूर्ती और उनके संगठन को बहुत मदद मिलने की बात कही और उनके प्रति कृतज्ञता प्रकट की।
इस अवसर पर पूजनीय डॉ. बाबासाहेब अम्बेडकर ने एक छोटा-सा लेकिन विचारपूर्ण भाषण दिया। उन्होंने कहा-
दुनिया के आगे, खासकर एशिया उपमहाद्वीप के आगे आज दो ही मार्ग हैं। एक बुद्ध का मार्ग और दूसरा मार्क्स का मार्ग। समय रहते दुनिया अगर बुद्ध के बताए मार्ग का अनुसरण नहीं करती है तो कम्युनिस्ट दर्शन की विजय होगी। आज दुनिया के लिए बुद्धदर्शन का ही एकमात्र आधार बचा है। उसका जितना प्रसार होगा उतनी दुनिया युद्ध से दूर और शांति के करीब पहुंचेगी। केवल बुद्ध के विचार ही दुनिया को तबाह होने से बचा सकते हैं।
पूजनीय डॉ. बाबासाहेब अम्बेडकर के भाषण का उपस्थित लोगों पर बहुत असर हुआ। बौद्ध दर्शन के बारे में एक नए नजरिए को लेकर ही कुछ लोग वहां से निकले।
जनताः 14 मार्च, 1953